क्राइम न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़।
बात गले नहीं उतर रही। इशारा किसी बड़ी अनदेखी की ओर हो रहा है। मगर इसे लोग इत्तेफाक ही मान रहे हैं। वह भी हर दिन मौत की पर्ची लेकर दौड़ने वाली सिटी बस सेवा की उसी एक बस के साथ, जो एक साल में दूसरी बार दुर्घटनाग्रस्त होती है। जी हां, खूनी कोठिया मोड़ पर मंगलवार दोपहर दो बसों की भिड़ंत में सिटी बस सेवा की जिस बस यूपी-81 एएफ 3848 में सवार 11 लोग मारे गए।
उसका बीमा एक्सीडेंट के ठीक दूसरे दिन यानि 5 सितंबर 2018 को समाप्त हुआ है। इस बात की गवाही आरटीओ की ऑनलाइन बेवसाइट का डाटा दे रहा है। इसी तरह बारात की बस संख्या यूपी-81 बीटी 4054 का बीमा 11 अगस्त को ही खत्म हो गया। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि यह महज इत्तेफाक है या सोची समझी साजिश? यह तो अगर गंभीरता से जांच हो, तभी साफ होगा।
मगर इतना जरूर है कि मौत की पर्ची लेकर फर्राटा भरने वाली सिटी बस सेवा की बसों में बड़ा गोलमाल है। आरटीओ को दुर्घटना के 24 घंटे बाद भी इस बस का परमिट नहीं मिल पा रहा है। आखिरकार इस कदर मौत को दावत देने वाली अनदेखी के लिए कौन जिम्मेदार है? कब इस दिशा में सिस्टम की चुप्पी टूटेगी? आखिर कब तक मौत होती रहेंगी और कौन सी दुर्घटना बड़ी कार्रवाई का अगुवा बनेंगी?
वाहन दुर्घटना को लेकर बीमा के नियम पर अगर गौर करें तो बीमा कंपनी बीमित वाहन में हुए नुकसान के अलावा वाहन में सवार दुर्घटनाग्रस्त लोगों या उनके परिवारों को भी भुगतान करती है। अब चूंकि ऑनलाइन बेवसाइट पर भरोसा करें तो बारात की बस बिना बीमा के दौड़ रही थी। उससे तो बीमा भुगतान मिलना संभव नहीं। हां, सिटी बस जरूर बीमित थी।
उससे दोनों बसों का व यात्रियों का बीमा भुगतान होगा। मगर वह भी तब, जब यह साबित हो कि गलती दोनों में से किस वाहन की थी। दूसरा चर्चा यह भी है कि जब बस एक साल पहले दुर्घटनाग्रस्त हुई। इसके बाद मुकदमे, तकनीकी जांच, फिटनेस आदि से दुरुस्त होकर सड़क पर दौड़ने लगी और दूसरे ऑपरेटर ने उसे खरीद लिया तो फिर बीमा, परमिट आदि की औपचारिकताएं दुरुस्त क्यों नहीं थीं।
जो ड्राइवर सिटी बस चला रहा थ, उसके पास ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं था। क्या जान बूझकर किसी वजह से ऑपरेटर ने यह अनदेखी कर रखी है। यह ऑपरेटर ही बेहतर बता पाएगा।
तीसरा इत्तेफाक..चाचा के स्थान पर था भतीजा, नहीं था डीएल
यह भी इस बस के साथ तीसरा बेहद महत्वपूर्ण इत्तेफाक है। आरटीओ की अब तक की जांच में यह बात भी सामने आई है कि एक्सीडेंट में मारे गए सिटी बस के ड्राइवर पवन के पास ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं था। जांच में पता चला है कि पवन मथुरा रोड की सिटी बस सेवा की किसी बस पर चलता था। जो बस एक्सीडेंट का शिकार हुई है, उस पर पवन का चाचा चलता था। मंगलवार को वह किसी वजह से बस पर नहीं पहुंचा और यह एक्सीडेंट हो गया। इसे लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। आखिर पवन ही इस बस पर मंगलवार को क्यों आया और बस का एक्सीडेंट हो गया।
जांच जारी, पर आरटीओ ने माना रफ्तार मौतों की जिम्मेदार
इस दुर्घटना को लेकर पुलिस व मजिस्ट्रेटी जांच के अलावा संभागीय परिवहन अफसर अपने स्तर से जांच करा रहे हैं। बुधवार को आरआई के स्तर से तकनीकी मुआयने की औपचारिकताएं पूरी की गईं। अभी तकनीकी मुआयना पूरा नहीं हुआ है। गुरुवार को भी उस पर काम होगा। वहीं जांच के लिए एआरटीओ अमिताभ चतुर्वेदी को लगाया गया है। वह अपनी रिपोर्ट आरटीओ को देंगे, जिसे शासन को भेजा जाएगा। आरटीओ राधेश्याम ने बताया कि अब तक यह पता चला है कि बारात की बस का 2021 तक का नेशनल परमिट है। वहीं सिटी बस ऑपरेटर से अभी तक परमिट नहीं मिल पाया है। बीमा के सवाल पर वह ज्यादा कुछ नहीं बता पाए और इतना ही कहा कि जांच पूरी होने पर ही कुछ कहा जा सकेगा। फिटनेस दोनों वाहनों की दुरुस्त थी, यह बात वह मंगलवार को ही स्पष्ट कर चुके हैं। बातचीत में उन्होंने यह जरूर माना कि सिटी बस की रफ्तार इस हादसे का जिम्मेदार है। इसके लिए वह जरूर कार्रवाई और जिम्मेदारी तय करेंगे।