न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
हाथरस के पूर्व सांसद एवं अलीगढ़ की कोल सीट से तीन बार विधायक रहे पूरन चंद्र का लंबी बीमारी के बाद 15 अगस्त की शाम को निधन हो गया। वह किडनी और लिवर फेल होने के बाद वरुण ट्रामा सेंटर में भर्ती थे। आने वाली 24 अगस्त को वह 86वें वर्ष में प्रवेश करने वाले थे।
उनके भतीजे और आम आदमी पार्टी के जिला प्रभारी हेमेंद्र कुमार ने बताया कि पूरन चंद्र 1960 में सक्रिय राजनीति में आए और 1969 में पहली बार कोल विधानसभा क्षेत्र से भारतीय किसान दल से विधायक बने। 1974 दूसरी बार वह कांग्रेस के टिकट पर इसी विधानसभा से विधायक बने।
1980 में तीसरी बार वह कोल से कांग्रेस के विधायक चुने गए। इसके बाद हाथरस की सुरक्षित सीट से वह 1984 में सांसद बन गए। लगातार चुनाव जीतने वाले अलीगढ़ के कुछ चुनिंदा नेताओं में शुमार पूरन चंद्र सरल विचारों वाले नेता थे, जिन्होंने बच्चों को शिक्षित कराने पर बहुत जोर दिया।
हाथरस सुरक्षित सीट से सांसद बनने के बाद वह दो बार और सांसद का चुनाव लड़े लेकिन जीत नहीं पाए। लगभग 35 साल तक सक्रिय राजनीति में रहने के बाद वह अघोषित रूप से राजनीति से दूर हो गए। उन्होंने शाहपुर कुतुब में अपने गुरु के आश्रम में एक काली मंदिर की स्थापना कराई। वर्ष 2003 में उनके पुत्र ससेंद्र का निधन हो गया था लिहाजा पौत्र अभिषेक ने पूरन चंद्र को मुखाग्नि दी।
किशनपुर स्थित शमशान गृह में उनके अंतिम संस्कार में कांग्रेस के पूर्व सांसद चौ. विजेंद्र सिंह, हाथरस के पूर्व सांसद चंद्रपाल सैनी, मनोज सक्सेना, गिरिवर शर्मा, पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह, रुही जुबैरी सहित अन्य नेता मौजूद रहे। हेमेंद्र ने बताया कि उनकी तीन पुत्रियां अनीता, सुनीता और नमिता भी परिजनों के साथ यहां मौजूद रहीं।