क्राइम न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़।
हरदुआगंज मुठभेड़ में मारे गए साधुओं की सिलसिलेवार हत्या करने वाले गैंग के नौशाद-मुस्तकीम व उनके परिवार के आधार कार्ड छर्रा के पते पर फर्जी तरीके से बने हैं। इस परिवार ने पिछले निकाय चुनाव में छर्रा टाउन एरिया में मतदान भी किया है। यह खुलासा रविवार को उस समय हुआ, पुलिस टीम इनके परिवार की महिलाओं को लेकर कस्बा छर्रा पहुंची। जहां पाया गया कि 9 माह पहले अतरौली आकर बसने से पहले करीब तीन साल यह परिवार छर्रा में रहा। मगर इन तीन साल में इस परिवार ने 7 मकान बदले। सर्वाधिक समय जहूर के मकान में करीब दो साल किराये पर रहे। यह छर्रा में कहां से आए। अभी यह तस्दीक नहीं हो पाई है। मगर इतना सही है कि यह छर्रा के मूल निवासी नहीं हैं। ऐसे में इनके छर्रा के पते पर आधार कार्ड कैसे बन गए। वोटर लिस्ट में नाम कहां से आ गए। इसके लिए बीएलओ व टाउन एरिया स्टाफ को सोमवार को बुलाया गया है। माना जा रहा है कि किसी स्थानीय नेता की मदद से यह संभव हुआ होगा। अब पुलिस इनके मूल व स्थायी पते तक पहुंचने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाए हुए है। उम्मीद है कि एक-दो दिन में यह तस्वीर साफ हो जाएगी।
साधुओं सहित छह लोगों की हत्या करने वाले गैंग के कुछ सदस्य जेेल जा चुके हैं, जबकि दो बदमाश मुस्तकीम व नौशाद हरदुआगंज में पुलिस मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं। इन बदमाशों का मूल पता अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ है। मुठभेड़ पर सवार खड़े होने के बाद पुलिस को इनके मूल पते और क्राइम हिस्ट्री खंगालने में खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। बदमाशों के परिवार की महिलाओं को पुलिस ने थाने में बुलाकर पूछताछ की, मगर महिलाओं द्वारा बताई जा रही कहानी से पुलिस संतुष्ट नहीं है। महिलाएं बार-बार खुद को छर्रा का मूल निवासी बता रही हैं। इसी के चलते पुलिस महिलाओं को लेकर रविवार को छर्रा भी गई। वहां भी जिस मोहल्ले में रहती थीं वहां पूछताछ की गई। इस दौरान साफ हुआ कि जहूर के मकान में दो साल और बाकी छह मकानों में एक-एक या दो-दो महीने तक यह परिवार किराये पर रहा। कुल मिलाकर छर्रा में तीन साल तक रहे। इससे पहले कहां से आए, इस सवाल पर नौशाद की मां इतना बताकर रुक गई कि उसकी शादी पुरुलिया पश्चिम बंगाल में हुई थी। इसके बाद से पुलिस का माथा ठनक रहा है। छर्रा से पहले यह कहां रहते थे, इस बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है। न ही महिलाएं ये बात बता कर दे रहीं कि छर्रा से पहले उनका परिवार कहां रहता था। हालांकि पुलिस को कुछ महत्वपूर्ण जानकारी हाथ लगी हैं, इनका खुलासा पुलिस जल्द करने की बात कह रही है।
परिवार के बांग्लादेशी होने की दिशा में जांच तेज
जिस तरह से परिवार की महिलाएं अपने मूल पते को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं और परिवार का मुखिया गायब है। इसके चलते पुलिस का माथा ठनका हुआ है कि कहीं यह परिवार बांग्लादेशी तो नहीं। हालांकि अभी इस सवाल पर पुलिस भी चुप्पी साध रही है। बस इतना ही कहा जा रहा है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक कुछ नहीं कहा जा सकता। मोहर्रम, फिर शनिवार और रविवार के अवकाश के चलते कुछ तथ्य जुटा पाने में दिक्कत आई है। उम्मीद है कि सोमवार मंगलवार तक सब कुछ साफ हो जाएगा।
वैसपाड़ा में सादा वर्दी में पुलिस तैनात
मुस्तकीम-नौशाद व अन्य का परिवार जिस मोहल्ला वैसपाड़ा में रहता है, वहां अब पुलिस तैनात कर दी गई है। पुलिस कर्मी हर वक्त यहां के मूवमेंट पर नजर बनाए हुए हैं। इन परिवारों से मिलने आ रहे नेताओं को अब एसडीएम से अनुमति लेकर आना होगा। यहां कब कौन आ रहा है हर पल के मूवमेंट पर पुलिस नजर गड़ाए हुए है। राष्ट्रीय लोकदल के तहसील अध्यक्ष चौ. महाराज सिंह नेताजी ने बताया कि वह नौशाद और मुस्तकीम के परिजनों से मिलने गए थे, वहां मौजूद पुलिस ने मिलने नहीं दिया कह दिया कि पहले एसडीएम या किसी सक्षम पुलिस अधिकारी की अनुमति लेकर आएं तभी मिलने दिया जाएगा।
रहस्य बना मुस्तकीम के पिता का गायब होना
एनकाउंटर में बदमाशों के मारे जाने पर जहां तमाम राजनेता इस परिवार से मिलने पहुंच रहे हैं, वहीं बेटे मुस्तकीम की मौत की सूचना के बाद भी उसका पिता इरफान आखिर क्यों पुलिस के सामने नहीं आ रहा। यह रहस्य बना हुआ है। मुस्तकीम की दादी रफीकन और मां शबाना केवल इतना ही कहतीं है कि 16 सितंबर को जब पुलिस ने इस मोहल्ले से कुछ लोगों को उठाया था तभी से इरफान भी गायब है। अब सवाल यह है कि इरफान को किसी ने गायब किया है या वह खुद पुलिस के डर से गायब है। बेटे की मौत की सूचना के बाद भी आखिर वह अपने घर क्यों नहीं आ रहा। आखिर ऐसा क्या डर है उसे पुलिस से जो वह बचता फिर रहा है। लोगों का कहना है कि यदि वह अपनी जगह सही है तो उसे पुलिस के सामने आकर अपने परिवार का पूरा नाम पता बताना चाहिए। लोग उसके गायब होने पर तरह तरह की सवाल उठा रहे हैं। कुछ अन्य लोग भी इस परिवार के गायब हैं। उन्हें भी पुलिस के द्वारा ट्रेस किया जा रहा है। उनके भी कई घटनाओं में शामिल होने की बात कही जा रही है।
इस परिवार के मूल पते को लेकर चल रही जांच में रविवार को छर्रा से यह साफ हो गया कि यह लोग मात्र तीन साल किराये पर रहे। वहां उनके आधार कार्ड व वोटर लिस्ट में फर्जी तरीके से नाम शामिल हुए हैं। इसकी जांच के लिए बीएलओ को सोमवार को बुलाया गया है। छर्रा में यह लोग कहां से आए, इसकी जानकारी पर इनके अन्य जिलों के क्राइम रिकार्ड की जानकारी भी जल्द सामने आएगी। यह तो इनकी बातों से ही लग रहा है कि यह पश्चिम बंगाल से यहां आए हैं।
- अजय कुमार साहनी एसएसपी