क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
हरदुआगंज के तिहरे हत्याकांड में जेल भेजे गए हत्यारोपी बाबरिया गिरोह से तो नहीं थे। यह तर्क पुलिस हरदुआगंज कांड के ग्रामीण दंपती हत्याकांड की मॉडस अपरेंडी से दे रही है। माना जा रहा है कि जब बदमाश खेत में छिपे थे तो ग्रामीण दंपती के अचानक सामने आने पर हुई टोका-टाकी पर अपशकुन के चलते तो नहीं मार दिया। क्योंकि ऐसा बाबरिया अब तक करते आए हैं। हालांकि इस सवाल का जवाब एटा जेल में निरुद्ध पाशा से मिलेगा। इन अपराधियों का अब तक का ट्रैक रिकार्ड भी पुलिस खोज रही है। जल्द ही तस्वीर सामने आएगी।
घटनाक्रम के अनुसार जब बदमाश साधु को मारने पहुंचे तो वहां अचानक राहगीरों को देख वह खेत में जाकर छिपकर बैठ गए। इसी बीच ग्रामीण दंपती खेतों में दवा लगाने पहुंच गए और वहां उन्होंने फसल टूटी देखी तो अंदर छिपे बैठे बदमाशों को देखकर टोकाटाकी कर दी। इसी बात पर बदमाशों ने मात्र उन्हें मार दिया।
एसएसपी मानते हैं कि घुमंतू जाति में बाबरिया के बदमाश अब तक ऐसा करता आए हैं कि टोकाटाकी को वह अपशकुन मानते हैं। हालांकि जब तक इनका पूरा ट्रैक रिकार्ड न खंगाल लिया जाए और इनके सरगना एटा जेल में निरुद्ध पाशा से पूछताछ न हो जाए, तब तक तस्वीर साफ नहीं होगी।