अलीगढ़। सौतेले बेटे की हत्या में जेल गई महिला जब जेल से बाहर आई तो उसके पति की मौत हो गई। 10 साल बाद महिला ने अदालत में खुद को तो निर्दोष साबित कर दिया, लेकिन उसके सौतेले बेटे का कत्ल किसने किया था, यह पहेली अनसुलझी ही रही। इस पूरे मामले में महिला ने कत्ल का दाग तो झेला ही, साथ ही अपने एक बेटे और बेटी से भी जेल में काटी अवधि के दौरान अलग रही। इसके अलावा सदमे में हुई पति की मौत से उसका भी साथ छूट गया। इस तरह गत दिनों अदालत से बरी होने तक महिला का आधा परिवार खत्म हो चुका था।
मामले की पैरवी करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता नरेंद्र कुमार शर्मा कहते हैं कि थाना बरला क्षेत्र के एक गांव में एक व्यक्ति ने दो शादियां कीं। पहली पत्नी से एक बेटा था। पहली पत्नी की मौत के बाद दूसरी शादी की जिससे एक बेटा और एक बेटी हुई। सब कुछ ठीक चल रहा था। इस बीच सन 2006 में सौतेले बेटे की हत्या हो गई और उसका शव खेत में पड़ा मिला। इस हत्याकांड में महिला के जेठ ने मृतक की सौतेली मां और उसके भाई (यानी मृतक के सौतेले मामा) के खिलाफ धारा 302 और 201 में मामला दर्ज करा दिया। महिला और उसके भाई की गिरफ्तारी हुई, जिसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया।
लंबा समय जेल में गुजारने के बाद जब महिला को जमानत मिली तो उसके पति की सदमे में मौत हो चुकी थी। विधवा हो चुकी महिला के सामने अपने खुद के बेटे और बेटी की परवरिश के साथ ही स्वयं को निर्दोष साबित करने की भी चुनौती थी। घटना के 10 साल बाद महिला ने अदालत में खुद को बेदाग साबित कर दिया है, इसी के साथ उसे बाइज्जत बरी भी कर दिया गया। अधिवक्ता नरेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि इस पूरे मामले का दिलचस्प पहलू यह रहा कि महिला तो बरी हो गई, लेकिन सौतेले बेटे की हत्या किसने की, यह पहेली अनसुलझी ही रही।