वन विभाग में हुए घपलेबाजी में फंसी तरु हार्टिकल्चर प्राइवेट लिमिटेड फर्म को लेकर आरोप हैं कि इसको सिर्फ घपलेबाजी के लिए ही जूून 2018 में रजिस्टर्ड कराया गया। अधिकारियों को गुमराह करके फर्म से पौध खरीद के करार को मंजूरी दिलवाई गई। इस फर्म से नीम, शीशम, पीपल और कंजी आदि आठ प्रजातियों के तीन लाख से अधिक पौधों की खरीदारी दिखाई गई। इन पौधों की कीमत विभाग में 17 रुपये प्रति पौधा थी। जबकि फर्म से 60 रुपये प्रति पौधे के हिसाब से पौधों की खरीदारी को दर्शाया गया। इसके बाद अक्तूबर तक कंपनी के एसबीआई बैंक के खाता संख्या 37117755210 में जमा करवा दिया गया। इसके बाद इस फ र्म अस्तित्व में ही नहीं रही।
इस संबंध में मंडलायुक्त अजयदीप सिंह ने बताया कि शासन स्तर से पौधरोपण में जीवित पौधों की गणना और मौके पर सत्यापन कराया जाता है। सभी जिलों में यह सत्यापन होता है। इसी क्रम में अलीगढ़ में जांच टीम अपना काम कर रही है। इसके अलावा जो शिकायतें हैं उनकी भी जांच हो रही है। जांच के बाद शासन स्तर से ही कार्रवाई होगी।
शासन से हुईनौ करोड़ रुपये से अधिक घपलेबाजी की शिकायत में डीएफओ श्रीधर त्रिपाठी, वन रक्षक वेद प्रकाश और खैर की एक तरु हार्टिकल्चर प्राइवेट लिमिटेड फर्म को आरोपी बनाया गया है। आरोपों के अनुसार डीएफओ ने खैर रेंज में 2018-19 में कागजों में 3.30 लाख पौधों के लिए गड्ढे खुदवाए। इन फर्जी गड्ढों की फाइलें बनाकर विभागीय अधिकारियों को उच्च स्तर पर भेजी गईं। इसके लिए वन रक्षक वेद प्रकाश को ठेकेदार के तौर पर पेश किया गया। आरोप हैं कि इसके बाद विभाग से वेद प्रकाश के खाते में गड्ढा खुदान-भरान के नाम पर 2.50 करोड़ रुपये का भुगतान करवा दिया। फिर उन गड्ढों में भरने के लिए खैर के पते पर रजिस्टर्ड तरु हार्टिकल्चर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से खाद और जिप्सम की कागजों में खरीदारी की गई। इसके बाद नीम, शीशम, पीपल और कंजी जैसी आठ प्रजातियों वाले पौधों की खरीदारी दिखाई गई। इस फर्म से खरीदारी के फर्जी बिल बनवाए गए। इस खेल में सबसे बड़ी बात यह रही कि फर्जी बिल बनवाने के बाद विभाग के पास मौजूद पौधों को ही श्रीधर त्रिपाठी ने तरु हार्टिकल्चर से खरीद वाले पौधे दिखा दिए। इसके बाद फर्म को 6.38 लाख, 68 लाख और 79.46 लाख रुपये की तीन किस्तों में विभाग से भुगतान करा दिया।