अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के सुन्नी थियोलॉजी विभाग के पूर्व चेयरमैन मुफ्ती डॉ. मोहम्मद जाहिद खान ने कहा कि रोजे की हालत में कोरोना संक्रमित मरीज वैक्सीन लगवाता है, तो उसका रोजा नहीं टूटेगा, जबकि ताकत वाला इंजेक्शन लगवाने से रोजा टूट जाता है।
मुफ्ती जाहिद खान ने कहा कि इस्लाम में किसी भी इंसान की जान बचाना बहुत बड़ी इबादत मानी गई है। ऐसे में अगर कोई रोजेदार प्लाज्मा देता है, तो उसका रोजा नहीं टूटेगा। उन्होंने कहा कि कोरोना ने जो तबाही मचा रखी है, उससे बचाव के लिए जागरूकता और समझदारी का सबको परिचय देना होगा। कोविड-19 की गाइडलाइंस का पालन करना होगा। मुफ्ती ने कहा कि कोविड प्रोटोकाल के चलते मस्जिद में तरावीह की नमाज नहीं पढ़ पा रहे हैं, तो घर पर पढ़ सकते हैं। अगर केवल चार सूरतें याद हैं तो उन्हें 20 रकात में बार-बार पढ़ सकते हैं, जिससे तरावीह की नमाज हो सकती है।