फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोरोना : ममता की छांव को तरस रहे मासूम, कोविड वार्ड में भर्ती मांएं बहा रहीं आंसू

विज्ञापन
विज्ञापन
दीपक शर्मा
विज्ञापन

एक मां अपने बच्चे के लिए पूरी दुनिया से लड़ सकती है। लेकिन इस कोरोना वायरस ने मां और उसके कलेजे के टुकड़े के बीच दूरी पैदा कर दी है। हाल ही में मां बनी ऐसी महिलाएं, जो कोरोना संक्रमित पाई गई हैं, उनको दीनदयाल संयुक्त चिकित्सालय में बनाए गए कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया है। लेकिन बच्चे को संक्रमण से बचाने के लिए उन्होंने खुद उसे दूर कर दिया है।
अब ऐसी स्थिति में मासूम अपनी मां की ममता को तरस रहे हैं तो मांएं भी अपने बच्चे को सीने से लगाने के लिए तड़प रही हैं। अस्पताल से जुड़े लोगों का कहना है कि यह बड़ा ही हृदय विदारक है। बच्चा उधर अपनी मां के लिए रोता है तो मां इधर अपने नवजात बच्चे के लिए दिन-रात आंसू बहाती रहती हैं। लेकिन परिस्थिति यह है कि बच्चे के लिए कोई जोखिम नहीं लिया जा सकता। यहां भर्ती महिलाएं एक ही प्रार्थना करती हैं कि बस किसी तरह वह ठीक हो जाएं। उनका फाइनल टेस्ट नेगेटिव आए और वह जल्द से जल्द अपने कलेजे के टुकड़े के पास पहुंच जाएं।
विज्ञापन

केस एक
सासनी गेट की 26 वर्षीय एक महिला ने दो महीने पहले बेटे को जन्म दिया। घर में खुशियां ही खुशियां थीं। घर में बधाई देने वालों के आने का सिलसिला भी शुरू हुआ। किसी को अंदाजा भी नहीं था बधाई के साथ उनको कोरोना की बीमारी भी मिल जाएगी। इस दौरान पड़ोस में कुछ केस पॉजिटिव पाए गए। संपर्क में आए सभी लोगों की सैंपलिंग हुई तो उसमें महिला को भी पॉजिटिव पाया गया। राहत की बात यह थी कि बच्चे में संक्रमण नहीं पाया गया। इसके बाद मां को दीनदयाल स्थित कोविड वार्ड में भर्ती करा दिया गया।
केस दो
देहली गेट क्षेत्र में डेढ़ महीने पहले एक 32 वर्षीय महिला ने बच्ची को जन्म दिया। परिवार के एक सदस्य के पॉजिटिव पाए जाने के बाद अन्य सदस्यों का भी सैंपल लिया गया। जिसमें महिला को भी पॉजिटिव पाया गया। इसके बाद महिला को दीनदयाल स्थित कोविड-19 वार्ड में भेज दिया गया। बताया जाता है कि मां से अलग करते समय बच्ची बिलख पड़ी। परिजनों के मुताबिक बच्ची अभी भी अपना मां का दूध पीने के लिए होंठ चलाती रहती है।
विज्ञापन

संक्रमित व्यक्ति के साथ किसी को भी नहीं रखा जा सकता है। दीनदयाल हॉस्पिटल सहित जितने भी आइसोलेशन सेंटर और कोविड-19 अस्पताल बनाए गए हैं, उनमें संक्रमित व्यक्तियों का सही तरीके से उपचार हो सकता है और उन पर पर्याप्त नजर रखी जा सकती है। यह मरीज के स्वयं के हित में है।
- डॉ. राहुल कुलश्रेष्ठ, सह प्रभारी, कोविड-19 नियंत्रण कक्ष
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें