कांग्रेस नेता के बेटे की उल्टी दस्त से मौत के बाद एक बार फिर से शहर के एक बड़े हिस्से में दूषित पेयजल आपूर्ति का विषय चर्चा में आ गया है। स्वास्थ्य विभाग इस संबंध में नगर निगम को पहले ही पत्र लिख चुका है, लेकिन इसके बाद भी पानी आपूर्ति को लेकर उदासीन रवैया बना हुआ है। जिला अस्पताल सहित निजी क्लीनिकों पर भी उल्टी दस्त के मरीजों का आना लगातार जारी है।
जेल रोड आवास विकास कालोनी के रहने वाले आनंद बघेल कांग्रेस में विभिन्न पदों पर रहे हैं। उनके ढाई वर्षीय बेटे दैवित बघेल को चार दिन पहले उल्टी दस्त की शिकायत हुई थी। जिसके बाद बच्चे को रामघाट रोड स्थित एक निजी नर्सिंग होम में ले जाया गया। यहां पर बच्चे का उपचार चलता रहा था, लेकिन उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। आनंद बघेल ने बताया कि लगातार बिगड़ती हालत के बाद दैवित बघेल ने आखिरकार जिंदगी से हार मान ली।
यहां पर गौर करने वाली बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग लगातार दूषित पानी आपूर्ति के संबंध में नगर स्वास्थ्य अधिकारी को लिख रहा है। सीएमओ डॉ. एमएल अग्रवाल कहते हैं कि जिला अस्पताल के माध्यम से साफ पानी आपूर्ति के लिए पत्र लिखा, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। दूषित पानी शहर की बड़ी आबादी के लिए समस्या बना हुआ है। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. यशपाल रावल कहते हैं कि जब अस्पताल में बड़ी संख्या में उल्टी दस्त के केस आने शुरू हुए तो यह पाया कि जिन इलाकों में दूषित पानी की आपूर्ति हो रही है, वहां से मामले ज्यादा आ रहे हैं। जिसके बाद नगर स्वास्थ्य अधिकारी को पूरी स्थिति से अवगत कराया गया था।
- स्वास्थ्य विभाग का पत्र मुझे मिला। मैं सारा काम स्वयं थोड़े ही करूंगा। मैंने पत्र जीएम जल और अन्य संबंधित पटल को भेज दिया। लाइनों की मरम्मत करने की जिम्मेदेरी उन्हीं की है।
- डॉ. शिव कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी