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Aligarh: रोडवेज की कमाई लाखों में, पर यात्री सुविधाएं धेलाभर भी नहीं, साफ-सफाई का अभाव, घूमते हैं पशु

Mon, 12 Feb 2024 06:54 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

अमर उजाला की टीम ने अलीगढ़ के तीनों बस अड्डों में यात्री सुविधाओं का जायजा लिया। बस अड्डों पर समुचित साफ-सफाई का अभाव है। निराश्रित पशु धमाचौकड़ी करते रहते हैं। कई बार तो यात्रियों की जान पर भी बन आती है। लोगों को पानी खरीदकर पीना पड़ता है।
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मसूदाबाद बस स्टैंड पर फैले पड़े पाइप - फोटो : संवाद
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विस्तार
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अलीगढ़ शहर में गांधी पार्क, मसूदाबाद और सारसौल सेटेलाइट बस अड्डे से करीब 25-30 हजार यात्री रोजाना सफर करते हैं। इससे रोडवेज विभाग को लाखों रुपये की कमाई होती है, मगर महकमा यात्रियों को सुविधाएं धेलाभर नहीं देता है। बस अड्डों पर समुचित साफ-सफाई का अभाव है। निराश्रित पशु धमाचौकड़ी करते रहते हैं। कई बार तो यात्रियों की जान पर भी बन आती है। लोगों को पानी खरीदकर पीना पड़ता है। आलम यह है कि कर्मचारियों के लिए यहां पर कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। सुविधाएं न मिलने पर यात्रियों में नाराजगी है। उनका कहना है कि रोडवेज आए दिन किराया तो बढ़ा देता है मगर सुविधाएं देने में कंजूसी दिखाता है। 11 फरवर को अमर उजाला की टीम ने तीनों बस अड्डों में यात्री सुविधाओं का जायजा लिया।

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सारसौल सेटेलाइट बस अड्डा परिसर में भर दिया कूड़ा-करकट, दुर्गंध से यात्री बेहाल
जीटी रोड के पास सारसौल सेटेलाइट बस अड्डे को बने छह साल हो चुके हैं, लेकिन अभी तक यहां यात्री सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। बस अड्डे की चाहरदीवारी व मिट्टीभराव का काम शुरू नहीं हो सका है। परिसर में भराव के नाम पर कूड़ा-करकट जरूर डाल दिया गया है, जिससे उठने वाली दुर्गंध यात्रियों को परेशान करती है। बारिश में कीचड़ और सड़ांध से स्थिति और खराब हो जाती है। यहां निराश्रित पशु घूमते रहते हैं, कई बार यात्रियों पर हमलावर हो जाते हैं।

यात्रियों की सुविधा के नाम पर एक टिन शेड, महिला व पुरुष के लिए एक-एक शौचालय, एक हैंडपंप व पानी की टंकी है। नियमित साफ-सफाई के अभाव में शौचालयों गंदगी पसरी रहती है। ऐसे महिला यात्रियों को खासी दिक्कत उठानी पड़ती है। बस अड्डे पर बैठने के लिए बेंच तक नहीं पड़ी हैं। रात में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था न होने से यात्रियों में असुरक्षा की भावना बनी रहती है। यहां से दिल्ली, नोएडा, बल्लभगढ़, कासगंज, एटा के लिए बसें संचालित होती हैं।
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मसूदाबाद बस स्टैंड पर तीन साल बाद भी यात्री सुविधाएं मुहैया नहीं करा पाए अफसर
करोड़ों रुपये खर्च कर इस बस अड्डे का सुंदरीकरण कराया गया है। करीब तीन साल पहले शहर को जाम से निजात दिलाने के लिए इसे जल्दबाजी में शुरू करा दिया गया, मगर जिम्मेदार अफसर यहां पर यात्री सुविधाएं उपलब्ध कराना ही भूल गए। तीन साल गुजरने के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। यहां से हरिद्वार, मेरठ, मथुरा, आगरा, बुलंदशहर, खुर्जा, बरेली, मुरादाबाद आदि स्थानों की बसों का संचालन हो रहा है।
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गांधीपार्क बस स्टैंड के शौचालयों में गंदगी, पीने का साफ पानी तक उपलब्ध नहीं
करीब सात साल पहले इस बस अड्डे का करोड़ों की लागत से सुंदरीकरण कराया गया था। यहां बसों की भरमार के चलते जीटी रोड पर दिनभर जाम जैसे हालात रहते थे। बीते दिनों जिला प्रशासन ने इस बस अड्डे को बंद करा दिया है। अब यहां से ई-बसों का संचालन किया जा रहा है। शौचालयों की नियमित साफ-सफाई न होने और दीवारों पर गुटखे के निशान यहां के हालात बयां करने के लिए काफी हैं। पीने के पानी के लिए बनीं अधिकांश टंकियां भी खराब हैं। इसके अलावा, निराश्रित पशुओं का जमावड़ा भी रहता है। इसकी वजह से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।


यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है। मसूदाबाद व सारसौल सेटेलाइट बस अड्डे पर यात्रियों के लिए मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। सारसौल सेटेलाइट बस स्टैड का पीपीपी मॉडल पर निर्माण कराया जाएगा।- सत्येंद्र वर्मा, क्षेत्रीय प्रबंधक रोडवेज

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