तस्वीर महल स्थित मुख्य डाकघर
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मोबाइल और सोशल मीडिया के दौर में अब लोग निजी संदेशों के लिए पोस्टकार्ड या अंतर्देशीय लिफाफे का सहारा नहीं लेते, लेकिन भरोसे के नाम पर डाकघर की साख आज भी कायम है। डाकघर में रजिस्टर्ड डाक और स्पीड पोस्ट की संख्या में करीब 30 फीसदी का इजाफा हुआ है। इसका मुख्य कारण सरकारी दस्तावेजों और व्यावसायिक पत्राचार की विश्वसनीयता है। - विनय कुमार वार्ष्णेय, सीनियर पोस्टमास्टर, प्रधान डाकघर
औपचारिक डाक में तेजी
दिलचस्प है कि जहां भावनाओं से जुड़ी डाक कम हुई है, दूसरी ओर जरूरी और औपचारिक डाक में तेजी आई है। स्पीड पोस्ट की संख्या में करीब 30 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2021 में प्रतिदिन 3500 स्पीड पोस्ट होती थीं, जो 2025 में बढ़कर 5500 तक पहुंच गई हैं। सरकारी दस्तावेज, बैंकिंग कागजात, न्यायालय से जुड़े पत्र और व्यावसायिक संचार के लिए अब भी डाकघर सबसे भरोसेमंद माध्यम माना जा रहा है।
बदल गया डाकघर का स्वरूप
पहले जहां काउंटर पर पोस्टकार्ड और अंतर्देशीय लेने वालों की कतार दिखती थी, अब वहां स्पीड पोस्ट और रजिस्टर्ड डाक कराने वालों की भीड़ नजर आती है। डिजिटल युग ने संचार का तरीका बदल दिया है। संदेश भले ही अब सेकंडों में पहुंच जाएं, लेकिन स्याही से लिखे शब्दों की वह खुशबू और डाकिए की घंटी का इंतजार धीरे-धीरे इतिहास बनता जा रहा है।
साल दर साल कम होती जा रही डाक
| साल |
साधारण डाक |
अंतर्देशीय |
पोस्टकार्ड |
स्पीड पोस्ट |
| 2021 |
7800 |
350 |
250 |
3500 |
| 2022 |
7400 |
310 |
210 |
4000 |
| 2023 |
7100 |
260 |
190 |
4400 |
| 2024 |
6500 |
150 |
150 |
5000 |
| 2025 |
6000 |
100 |
50 |
3500 |