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DD Hospital: मरीज को थमाई सीलन भरी दवा, जांच का नमूना भी बदला, सात दिन बाद मरीज को पता चला

Sun, 10 May 2026 11:18 AM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

रूचि को बलगम जांच के लिए नमूना देने के बाद एक पर्ची पर नंबर 10320 दिया गया। अगले दिन रिपोर्ट लेने के लिए कहा, लेकिन 23 अप्रैल को उन्हें रिपोर्ट मिली जिस पर किसी अन्य महिला का नाम और नमूना नंबर चढ़ा हुआ था। यह देख वह काफी हैरान हुईं।
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दीनदयाल संयुक्त अस्पताल अलीगढ़ - फोटो : संवाद
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विस्तार
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सुबह उठते ही कफ और दिन भर सूखी खांसी से काफी परेशान हूं। जब आराम नहीं मिला तो 18 अप्रैल को दवा लेने के लिए अलीगढ़ के पंडित दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय पहुंची। डॉक्टर ने पर्चे पर दवा लिख दी और बलगम जांच कराने के लिए कहा। जब नमूना देने के लिए काउंटर पर गई तो वहां बोला कि कल आकर देना।

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ओजोन सिटी निवासी रूचि ने आगे बताया कि पहले दिन वे सिर्फ दवा लेकर वापस घर लौटा आईं। शाम के वक्त जब उन्होंने डॉक्टर द्वारा बताए समय पर दवा ली तो पाया कि पूरी दवा अंदर से सील गई थी। दवा के रैपर पर उसके लाल रंग के धब्बे पड़े हुए थे। इसके चलते उन्हें मजबूरी में बाजार जाकर महंगी दवाई लेनी पड़ी जिसका साल्ट भी बदला हुआ था। 21 अप्रैल को रूचि फिर अस्पताल पहुंची और उन्हें बलगम जांच के लिए नमूना देने के बाद उन्हें एक पर्ची पर नंबर 10320 दिया गया। 

अगले दिन रिपोर्ट लेने के लिए कहा, लेकिन 23 अप्रैल को उन्हें रिपोर्ट मिली जिस पर किसी अन्य महिला का नाम और नमूना नंबर चढ़ा हुआ था। यह देख वह काफी हैरान हुईं। जब उन्होंने काउंटर पर बताया तो वह हंसते हुए बोला, अरे मैडम गलती हो गई, सॉरी। आपका सैंपल किसी दूसरे मरीज से बदल गया है। आप कल आकर अपनी रिपोर्ट ले जाना। रूचि फिर से अगले दिन पहुंची, उन्हें संशोधित रिपोर्ट तो मिल गई लेकिन रूचि को इस पर भरोसा भी नहीं रहा।

नमूना बदलना व गली हुई दवा दिया जाना लापरवाही है। इस विषय को गंभीरता से लेकर जांच कराई जाएगी। रहा सवाल एक्सरे फिल्म न देने का तो इसकी समस्या है। फिल्म की कमी के कारण मरीज को स्क्रीन पर ही फिल्म दे दी जाती है। -डाॅ.एमके माथुर, सीएमएस

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शिकायत करने से भी क्या फायदा?
एक सवाल पर रूचि ने कहा कि शिकायत करने से कोई फायदा नहीं है। डीडीयू अस्पताल की स्थिति वाकई बहुत खराब है। वहां से लगातार खामियों की खबरें आती हैं और हर बार जिम्मेदार अधिकारी बिना कार्रवाई बच जाते हैं। रूचि ने कहा, ''एक बीमारी की जांच के लिए मुझे सात दिन में चार बार अस्पताल के चक्कर लगाने पड़े। जांच नमूना बदल गया। एक्सरे कराया तो उसकी रिपोर्ट अब तक नहीं मिली। डॉक्टर ने दवा लिखी तो सीलन भरी दवा थमा दी। इससे भी बुरे क्या हालात होंगे कि काउंटर पर बैठा आदमी मुस्कराते हुए मुझसे सॉरी बोल रहा था। उसे देख समझ आ रहा था कि वहां अक्सर ऐसा होता होगा, इसीलिए उसने हंसते हुए सॉरी बोल दिया।'' रूचि ने कहा कि आखिर कोई भी सिस्टम इतना लाचार और लापरवाह कैसे हो सकता है?

मोबाइल पर ही मिली एक्सरे रिपोर्ट
नमूने के अलावा दूसरी समस्या रुचि के सामने यह भी आई कि उन्हें एक्सरे रिपोर्ट 9 मई तक नहीं मिली। डॉक्टर ने बलगम जांच के साथ-साथ उन्हें एक्सरे कराने की भी सलाह दी गई थी। अस्पताल में ही उन्होंने एक्सरे कराया। जिसकी रिपोर्ट उन्हें उनके मोबाइल में फोटो खींचकर ही दे दी गई। उसी को उन्होंने डॉक्टर को दिखाकर इलाज लिया। मगर एक्सरे फिल्म आज तक नहीं मिली।
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