अब तक सत्ताधारी भाजपा ने बीच में एक सर्वे सभी दलों के संभावित दावेदारों और मौजूदा जनप्रतिनिधियों के बारे में कराया है। अब फिर से एक नए सर्वे की तैयारी है। पार्टी अपने स्तर से भी फीडबैक ले रही है, जिसमें एक-एक सीट पर एसआईआर के बाद के हालात, लोगों की शिकायत-नाराजगी, मौजूदा जनप्रतिनिधियों की सक्रियता, संभावित दावेदारों की सक्रियता और पैंठ आदि पर जानकारी जुटाई जा रही है।
तरह सपा की तरफ से अपने युवा फ्रंटलों को लगाकर पहले एससी आरक्षित सीटों पर जातिवार आंकड़ा, सभी दलों के प्रभावशाली नेता, पार्टी के प्रमुख दावेदारों की स्थिति, विपक्षी दावेदारों की स्थिति आदि बिंदुओं पर ब्योरा संकलित कराया जा रहा है। यह काम छह जून तक पूरा कराने के बाद बाकी सीटों पर इसी तरह सर्वे कराया जाएगा।
इससे पहले एक सर्वे खुद पार्टी स्तर से पार्टी के प्रमुख दावेदारों को लेकर कराया जा चुका है। बसपा में सीधे तौर पर किसी सर्वे की जानकारी नहीं मिल रही, लेकिन पार्टी स्तर से संभावित दावेदारों की नब्ज टटोली जा रही है। जिसमें उनके प्रभाव को देखा जा रहा है।
जनता के बीच बढ़ी सक्रियता
चुनाव को नजदीक देख और पार्टी लाइन पर हो रहे कामकाज की जानकारी मिलने पर जिले में अधिकांश जनप्रतिनिधि अब जनता के बीच कुछ ज्यादा ही सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। बीच-बीच में जनता दरबार से दूरी रखने वाले जनप्रतिनिधियों के जनता दरबार सजने लगे हैं। अब विधानसभा क्षेत्र में लोगों के सुख-दुख में भी जनप्रतिनिधि खुद पहुंच रहे हैं या अपने परिवार के सदस्यों को भेज रहे हैं। क्षेत्र में भ्रमण, समस्याओं पर संवाद आदि पर भी जनप्रतिनिधि ध्यान देने लगे हैं।
ये तथ्य भी समझिये
जिले में सातों विधानसभा सीटों पर भाजपा पिछली दो बार से काबिज है। इनमें से चार सीटें शहर, कोल, छर्रा व अतरौली 2012 में सपा के कब्जे में थीं। 2022 के चुनाव में सपा इन चारों सीटों पर कांटे के मुकाबले में दूसरे स्थान पर रही। वापसी के लिए प्रयासररत सपा का इन चारों सीटों पर फोकस सबसे अधिक है। बाकी तीन सीट खैर, इगलास व बरौली 2012 में रालोद के कब्जे में थीं। इन सीटों पर गठबंधन व जातीय गणित के अनुसार जानकारियां जुटाई जा रही हैं। हालांकि 2024 के लोकसभा व उपचुनाव में खैर सीट पर सपा कांटे के मुकाबले में दूसरे स्थान पर पहुंची है।