खैर विधानसभा सीट पर उपचुनाव लड़ने के लिए रालोद के कुछ नेताओं ने दावेदारी की थी। चूंकि रालोद भाजपा का गठबंधन है इसलिए टिकट के लिए रालोद नेताओं ने पार्टी हाईकमान के साथ-साथ भाजपा और संघ नेताओं से भी संपर्क साधा। अब भाजपा के तीन नामों का पैनल तैयार होने के बाद रालोद में बगावत की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। चर्चा है कि रालोद के नेता अन्य दल से चुनाव लड़ सकते हैं अथवा निर्दलीय भी मैदान में उतर सकते हैं।
त्रिकोणीय मुकाबले के आसार
खैर सुरक्षित सीट पर लगभग 1.15 लाख जाट और 60 हजार से अधिक ब्राह्मण वोटर हैं। एससी वोटरों की कुल संख्या 1 लाख से ऊपर है। करीब 40 हजार वैश्य और करीब 30 हजार मुस्लिम वोटर हैं। जाटों की बहुतायत होने के चलते इस सीट को जाटलैंड कहा जाता है। भाजपा और रालोद का गठबंधन है, सपा और कांग्रेस का गठबंधन है। दूसरी ओर बसपा भी सक्रिय है, दलित वोटों के साथ अन्य में घुसपैठ की कोशिश में जुटी है। ऐसे में त्रिकोणीय मुकाबले की भी संभावना बनती है।
खैर विधानसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी ही उपचुनाव लडे़गा। जिला स्तर से टिकट के दावेदारों के नाम प्रदेश मुख्यालय में भेज दिए गए हैं। प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व से जिसे भी टिकट दी जाएगी उसे मजबूती के साथ चुनाव लड़ाया जाएगा।- कृष्ण पाल सिंह लाला, भाजपा जिलाध्यक्ष
खैर में उपचुनाव को लेकर पार्टी की पूरी तैयारी है। टिकट के दावेदारों के नामों का पैनल तैयार किया जा रहा है। जल्द ही सूची पार्टी सुप्रीमो मायावती को भेजी जाएगी। जो भी नाम तय होगा उसे मजबूती से चुनाव लड़ाया जाएगा।- मोरध्वज कुशवाहा, बसपा जिलाध्यक्ष
खैर सीट पर उपचुनाव में टिकट के लिए 22 दावेदारों के नाम पार्टी नेतृत्व को भेजे गए हैं। चूंकि चारू केन पार्टी की सदस्य नहीं हैं, इसलिए इनका नाम दावेदारों की सूची में नहीं है।- ठा. सोमवीर सिंह, कांग्रेस जिलाध्यक्ष
सबको मिला मौका
1967, 1974 और 1980 में कांग्रेस को यहां जीत मिली। 1985 में लोकदल और 1989 में जनता दल के खाते में जीत आई। 1991 में रामलहर में यहां भाजपा का खाता खुला जब चौधरी महेंद्र सिंह को जीत मिली। 1993 में सीट जनता दल के पास चली गई। 1996 में भाजपा ने चौधरी चरण सिंह की बेटी ज्ञानवती को उम्मीदवार बनाया। ज्ञानवती जीत गईं। 2002 में बसपा से प्रमोद गौड़ जीते। 2007 में रालोद ने यह सीट अपने खाते में डाल ली। 2008 के परिसीमन के बाद खैर सीट सुरक्षित हो गई, लेकिन 2012 के चुनाव में भी रालोद को जीत मिली। इस सीट पर अनूप प्रधान ने 2017 में करीब 23 साल बाद कमल खिला दिया। 2022 में अनूप प्रधान जीते।
2022
- अनूप वाल्मीकि, भाजपा : 1,39,643
- चारू केन, बसपा : 65,302
- भगवती प्रसाद, रालोद : 41,644
2017
- अनूप वाल्मीकि, भाजपा : 1,24,198
- राकेश कुमार मौर्य, बसपा : 53,477
- ओम पाल सिंह, रालोद : 41,888
2012
- भगवती प्रसाद, रालोद : 93,470
- राजरानी, बसपा : 54,696
- अनूप वाल्मीकि, भाजपा : 26,609
कुल वोटर : 4.03 लाख
पुरुष : 2.15 लाख
महिला : 1.87 लाख
खैर विधानसभा सीट पर हुए चुनाव
- 1952 में कांग्रेस से मोहनलाल गौतम (टप्पल, खैर, चंडौस, जवां संयुक्त विधानसभा क्षेत्र)
- 1957 में कांग्रेस से चौ. देवदत्त सिंह (टप्पल विधानसभा क्षेत्र बना)
- 1962 में निर्दलीय चौ. महेंद्र सिंह
- 1967 में कांग्रेस से चौ. प्यारेलाल (खैर विधानसभा क्षेत्र बना)
- 1969 में भारतीय क्रांति दल से चौ. महेंद्र सिंह
- 1974 में कांग्रेस से चौ. प्यारेलाल
- 1977 में जेएनपी से चौ. प्यारेलाल
- 1980 में कांग्रेस से चौ. शिवराज सिंह
- 1985 में लोकदल से चौ. जगवीर सिंह
- 1989 में जनता दल से चौ. जगवीर सिंह
- 1991 में बीजेपी से चौ. महेंद्र सिंह
- 1993 में जनता दल से चौ. जगवीर सिंह
- 1996 में भाजपा से ज्ञानवती सिंह पुत्री चौ. चरण सिंह
- 2002 में बसपा से प्रमोद गौड़
- 2007 में रालोद से चौ. सत्यपाल सिंह
- 2012 में रालोद से भगवती प्रसाद सूर्यवंशी
- 2017 में भाजपा से अनूप प्रधान
- 2022 में भाजपा से अनूप प्रधान