पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर क्या अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में आज भी लगी हुई है। आलोक कुमार नामक युवक द्वारा जनसूचना अधिकार के अंतर्गत इससे संबंधित सूचना मांगे जाने के बाद एएमयू में खलबली मच गई है। विश्वविद्यालय के जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को पता नहीं है कि जिन्ना की तस्वीर कहां लगी हुई है? एएमयू के केंद्रीय सूचना अधिकारी इसके लिए कई दफ्तरों का चक्कर लगा चुके हैं।
जानकारों का कहना है जिन्ना की तस्वीर एएमयू के यूनियन हॉल (छात्र संघ भवन) में लगी हुई है। फिलहाल मरम्मत कार्य चलने के कारण हॉल में ताला लगा है। 1938 में एएमयू छात्र संघ द्वारा ऑल इंडिया मुस्लिम लीग के तत्कालीन अध्यक्ष मोहम्मद अली जिन्ना को मानद सदस्यता प्रदान की गई थी। उस समय वह एएमयू में आए भी थे। इस संबंध में एएमयू छात्र संघ निवर्तमान अध्यक्ष फैजुल हसन ने स्वीकार किया कि जिन्ना की तस्वीर यूनियन हॉल में लगी है।
उन्होंने कहा कि आजादी के पहले जिन्ना को छात्र संघ द्वारा मानद सदस्यता दी गई थी। उसके बाद कभी उनकी तस्वीर लगी होगी। उन्होंने कहा कि पहली बार 1920 में छात्र संघ द्वारा महात्मा गांधी को मानद सदस्यता प्रदान की गई थी। उसके बाद आज तक करीब 34 हस्तियों को मानद सदस्यता प्रदान की गई है। एएमयू छात्रसंघ के सबसे नए मानद सदस्य एएमयू के वर्तमान कुलपति प्रो. तारिक मंसूर हैं।
एएमयू छात्र संघ के मानद सदस्य
कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष एवं प्रमुख हस्तियों को अब तक यह सम्मान दिया गया है। महात्मा गांधी, सीवी रमण, नवाब आगा खां, स्वतंत्रता सेनानी खान अब्दुल गफ्फार खान, सर रॉस मसूद, मोहम्मद अली जिन्ना, विख्यात लेखक ईएम फॉस्टर, प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू, देश के अंतिम गवर्नर जनरल सी राजा गोपालचारी, अमृत कौर, सैयदना ताहिर सैफुद्दीन, इंडोनेशिया के उपराष्ट्रपति डॉ. मो. हत्ता, सऊदी अरब के किंग सऊद इब्न-ए-अब्दुल अजीज, उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल केएम मुंशी, ईरान के सम्राट मो. रजा पहलवी, पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई, पूर्व राष्ट्रपति वीवी गिरी, वीके कृष्णा मेनन, मौलाना सैयद अबुल हसन अल नदवी, वाईवी चौहान, यूएई के जमाल अब्दुल नसीर, बदरूद्दीन तैयब जी, डॉ. कर्ण सिंह, डॉ. जय प्रकाश नारायण, जस्टिस एम हिदायतुल्लाह, पत्रकार कुलदीप नैयर, मदर टेरेसा, जार्ज फर्नांडीस, मुलायम सिंह यादव, गुलाम नबी आजाद, दलाई लामा, रामविलास पासवान, ले. जनरल जमीउद्दीन शाह एवं प्रो. तारिक मंसूर।