2019 में भाजपा के पास मंडल की तीनों अलीगढ़, हाथरस व एटा संसदीय सीट थी। मगर 2024 के चुनाव में भाजपा ने एटा सीट हारी है, जबकि अलीगढ़ सीट पर जीत का अंतर सवा दो लाख से घटकर 15 हजार रह गया और पिछले चुनाव में मिले वोटों से भी कम वोट मिले हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 11 जुलाई को लखनऊ स्थित आवास पर अलीगढ़ मंडल के विधायकों से मुलाकात की। उनका सबसे अहम सवाल हाल के लोकसभा चुनाव में मंडल की तीन सीटों में से दो पर जनाधार गिरने का कारण जानना था। उन्होंने इसकी वजह पूछी और मंथन के बाद आगे का लक्ष्य दिया। कहा कि अब हमें अभी से माहौल बदलने की दिशा में काम करना होगा। 2027 के लक्ष्य में जुटना होगा।
विज्ञापन
2019 में भाजपा के पास मंडल की तीनों अलीगढ़, हाथरस व एटा संसदीय सीट थी। मगर 2024 के चुनाव में भाजपा ने एटा सीट हारी है, जबकि अलीगढ़ सीट पर जीत का अंतर सवा दो लाख से घटकर 15 हजार रह गया और पिछले चुनाव में मिले वोटों से भी कम वोट मिले हैं। हाथरस में जरूर भाजपा का सम्मान रह गया। वहां अच्छे अंतर से जीत दर्ज की है। इसी परिणाम की वजह जानने को लेकर मंडल के सभी मौजूदा विधायक व हाथरस के नवनिर्वाचित सांसद मुख्यमंत्री आवास पर बुलाए गए।
इस दौरान पार्टी विरोधी माहौल, अफवाहों, संविधान को लेकर जाति व वर्ग विशेष में विपक्षियों द्वारा पैदा किए गए माहौल आदि तथ्य रखे गए। वहीं सवाल यह भी खड़ा हुआ कि जब हर वर्ग में पार्टी व सरकार लोगों को योजनाएं दे रही है तो उसका लाभ क्यों नहीं मिल सका। इस पर तय हुआ कि अब हर स्तर पर जनप्रतिनिधि प्रचार प्रसार करेंगे, सोशल मीडिया पर योजनाओं के पक्ष में व अफवाहों के खिलाफ अभियान छेड़ा जाएगा। जनसंपर्क बढ़ाया जाएगा। यही आने वाले चुनाव का लक्ष्य होगा।
विज्ञापन
अधिकारियों के सिर भी फोड़ा ठीकरा
इस दौरान शहर के मामू भांजा प्रकरण आदि का उल्लेख करते हुए कुछ जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों के सिर भी ठीकरा फोड़ा। कहा कि अधिकारी बात सुनने या समझने की स्थिति में नहीं रहते। इसके चलते लोगों के बीच विरोधी माहौल बनता है। इस दौरान मुख्यमंत्री स्तर से भरोसा दिलाया गया है।