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बाढ़ से बचने की तैयारियां पूरी कर लें : डीएम

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पहाड़ों पर मूसलाधार बारिश और बैराजों से पानी छोड़े जाने से गंगा और यमुना का जलस्तर बढ़ रहा है। बृहस्पतिवार को डीएम विशाख जी ने सांकरा स्थित गंगा घाट का जायजा लेकर जलस्तर की नियमित निगरानी के निर्देश दिए। सोमवार को गंगा का जलस्तर 1.25 लाख क्यूसेक था, जो बृहस्पतिवार को तकरीबन 25 हजार क्यूसेक तक घट गया।
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जिला प्रशासन ने बाढ़ संभावित गांवों दीनापुर, बबरोतिया, हमीदपुर, रुस्तम नगर, किस्तौली, किरतौली, नगला आलिया, नगला बाग, शीशाई, गहतोली गंग आदि में बाढ़ चौकियां सक्रिय करने के साथ ही अन्य इंतजाम करना शुरू कर दिया है। डीएम ने एसडीएम अतरौली अनिल कटियार को गंगा के जल स्तर की नियमित निगरानी के लिए निर्देश दिए।



डीएम ने बढ़े हुए जल स्तर और बाढ़ से प्रभावित होने वाले संभावित गांवों की जानकारी ली। अफसरों से कहा कि ऐसे गांवों की नियमित गश्त की जाए। बाढ़ आने पर ग्रामीणों को जल की ओर न जाने दें। किसी प्रकार का खतरा होने पर ग्रामीणों को तत्काल सुरक्षित स्थान पर ले जाएं। बाढ़ नियंत्रण कक्ष को दुरूस्त रखें। एसडीएम अतरौली अनिल कटियार ने बताया बीते सोमवार को जल स्तर लगभग 1.25 लाख क्यूसेक था। बृहस्पतिवार को घटकर 25 हजार क्यूसेक रह गया है। सांकरा स्थित श्रीकृष्णा इंटर कॉलेज में बाढ़ चौकी बनाई गई है, जहां प्रशासन की टीम है। बाकी जल स्तर बढ़ने पर पहले से चिन्हित जगह पर बाढ़ चौकी बनाई जाएगी।
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सहायक अभियंता निचली गंगा खंड नरौरा अंकित सिंह ने बताया कि वर्ष 2010 में 6,11,823 क्यूसेक पानी छोड़े जाने से गंगा अधिकतम जलस्तर पर पहुंची थी, फिलहाल बाढ़ का खतरा नहीं है। निरीक्षण के दौरान सीडीओ आकांक्षा राणा, एसडीएम अतरौली अनिल कटियार, डीपीआरओ धनंजय जायसवाल, एसडीओ अंकित सिंह, सीओ छर्रा रविशंकर प्रसाद, वन रेंजर महफूज अली, बिजौली खंड विकास अधिकारी दीपक कुमार आदि मौजूद रहे।




गंगा यमुना का जलस्तर 10 जुलाई सुबह 6 बजे अब तक छोड़ा पानी प्रवृत्ति
भीमगौड़ा बैराज हरिद्वार का जलस्तर 290.95 मीटर 41307 क्यूसेक पानी घट रहा
नरौरा बैराज बुलंदशहर का जलस्तर 177.45 मीटर 57.541 क्यूसेक पानी घट रहा
यमुना नदी ओखला बैराज नई दिल्ली 194.80 मीटर 1630 क्यूसेक पानी घट रहा




खतरा शुरू होने का स्तर डिस्चार्ज
294 मीटर 3.50 लाख क्यूसेक
178 मीटर 2.50 लाख क्यूसेक
200 मीटर 3.00 लाख क्यूसेक




जून से 10 जुलाई तक हुई बारिश
नरौरा 261 मिलीमीटर
अलीगढ़ 310 मिलीमीटर
ओखला 05 मिलीमीटर
-एक क्यूसेक : 28.32 लीटर पानी प्रति सेकेंड की दर से होने वाला बहाव।




हर साल बाढ़ के पानी में फसलें डूब जाती हैं, लेकिन मुआवजा नहीं मिलता
सांकरा। गहतौली गंग निवासी नेत्रपाल ने बताया कि हर वर्ष बाढ़ में फसलें जलमग्न हो जाती हैं। बाढ़ के बाद लेखपाल आकर रिपोर्ट लेकर चले जाते हैं, लेकिन प्रशासन इसका कोई भी मुआवजा नहीं देता है। इससे किसानों को बहुत नुकसान होता है। करीब 14 वर्ष पूर्व गांव में बाढ़ आ थी, उस वक्त सांकरा स्थित बाढ़ चौकी पर ग्रामीणों को पहुंचाया गया था। कुछ लोग रिश्तेदारियों में चले गए थे, गांव खाली हो गया था। लोगों को बहुत नुकसान हुआ था।
गांव आलिया नगला निवासी हरदास यादव ने बताया वर्ष 2010 में बाढ़ आई थी, गांव में पानी भर गया था। प्रशासन ने लोगों को सांकरा स्थित बाढ़ चौकी पर ठहराया था। बीते वर्ष गांव के चारों तरफ पानी आ गया था, मकानों के पास तक पहुंच गया था, लेकिन कोई जनहानि नहीं हुई। गांव किरतौली निवासी तालेवर ने बताया पिछले वर्ष गांव में मकान तक पानी आ गया था। दो साल पूर्व कुछ घरों तक पानी आ गया था।




किरतौली में 900 कछुए हो रहे संरक्षित, मुकुंदपुर में बन रहा नया संरक्षण केंद्र
सांकरा। गांव किरतौली स्थित कछुआ संरक्षण केंद्र का डीएम ने निरीक्षण किया। इसको आधुनिक बनाने के निर्देश दिए। क्षेत्रीय वन अधिकारी गौरव सिंह ने बताया कि कछुआ संरक्षण केंद्र में वर्तमान में लगभग 900 कछुए के बच्चे संरक्षित किए जा रहे हैं, जिन्हें आगामी दिसंबर में उनके प्राकृतिक वास में छोड़ा जाएगा। इस केंद्र में मुख्य रूप से कछुए की तीन प्रजातियां संरक्षित की जा रही हैं, जिसमें ब्राउन रुफ्ड टर्टल, इंडियन टेंट टर्टल, थ्री स्ट्राइप्ड रुफ्ड टर्टल शामिल हैं। आगरा रोड पर मुकुंदपुर वन चेतना केंद्र में एक अन्य कछुआ संरक्षण केंद्र का निर्माण किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य संरक्षण के साथ-साथ जन जागरूकता को बढ़ावा देना है।
इस दौरान डीएम और सीडीओ ने इस वर्ष होने वाले पौधरोपण के लिए हारनपुर में 41.74 हेक्टेयर में खोदे गए गड्ढों का निरीक्षण किया। वन वाटिका में पौधे लगाए और समय से पौधरोपण लक्ष्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। संवाद
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