झील के साफ हिस्से में दुबार से जमा हुई जलकुंभी। संवाद
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शेखाझील पक्षी विहार में जलकुंभी को हटाने का काम बेहद धीमा है। दस दिन में झील का महज एक हेक्टेयर हिस्सा साफ हो सका है। झील का करीब तीस फीसदी हिस्सा जलकुंभी से भरा है। काफी जलकुंभी पानी में बहकर साफ हिस्से में फैल चुकी है।
शेखाझील की सफाई का काम शुरू हुआ था, तब पहले पखवाड़े में ही 50 फीसदी काम हो गया था लेकिन 9 जुलाई को कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य के पौधरोपण कार्यक्रम के बाद सफाई कार्य बेहद सुस्त पड़ गया है। साफ किए गए हिस्से में जलकुंभी को जाने से रोकने के विभागीय अधिकारियों के दावे भी गलत साबित हो रहे हैं। बहकर आई जलकुंभी साफ हुए हिस्से में फैलने लगी है।
पर्यावरणविद सुबोध नंदन शर्मा का कहना है कि सफाई में लेटलतीफी झील के लिए नुकसानदायक है। जलकुंभी साफ क्षेत्र में आ गई है, जो जल्द ही झील में दोबारा फैल जाएगी। इससे सफाई में होने वाला लाखों का खर्च मिट्टी में मिल जाएगा।यह प्रवासी पक्षियों के साथ बड़ी नाइंसाफी होगी।
सफाई के लिए सीएसआर फंड से 10 लाख मिले
जून माह के पहले हफ्ते से शेखाझील की साफ सफाई का काम शुरू हुआ था। 11 जून को मंडलायुक्त संगीता सिंह और जिलाधिकारी संजीव रंजन ने झील में श्रमदान कर सीएसआर फंड से सफाई के लिए 10 लाख रुपये का बजट जारी किया। इसके बाद पोकलेन मशीन और ट्रैक्टर ट्रॉली के जरिये पांच जुलाई तक 18 हेक्टेयर में फैली झील का करीब 60 फीसदी हिस्सा साफ किया गया। इसके बाद से अब तक महज एक हेक्टेयर हिस्सा ही साफ हो सका है।
झील में पानी ज्यादा होने से पोकलेन मशीन डूब रही थी, इस कारण काम रुका था। चार दिन पहले फिर से काम शुरू हो गया है। हापुड़ से आए मजदूर जलकुंभी को खींच कर किनारे ला रहे हैं, तथा मशीन उसे पानी से बाहर दूसरी ओर एकत्र कर रही है। साफ पानी में बहकर आई जलकुंभी को हटाकर जाल लगाकर उसे रोका जाएगा। -गौरव सिंह, क्षेत्रीय वन अधिकारी।