फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अलीगढ़ के जीवनगढ़ में दूषित पानी से बीमार हो रहे बच्चे, जिला अस्पताल का बच्चा बार्ड फुल

विज्ञापन
जिला चिकित्सालय के बच्चा वार्ड के बरामदे में बच्ची का उपचार कराती जैतून। संवाद - फोटो : CITY OFFICE
विज्ञापन
कौशल कुमार ओझा
विज्ञापन

महानगर में दूषित पानी बच्चों को बीमार बना रहा है। बच्चे टाइफाइड, डायरिया और पीलिया की चपेट में आ रहे हैं। मलखान सिंह जिला अस्पताल में पीडियाट्रिक ओपीडी में प्रतिदिन 150-200 बच्चे पहुंच रहे हैं। हालात तो यह हैं कि अस्पताल में 27 बेड के सापेक्ष 37 बच्चे भर्ती हैं। एक-एक बेड पर दो-दो बच्चों को इलाज दिया जा रहा है, जबकि कई बच्चों का गैलरी में भी इलाज किया जा रहा है। मौसम में बदलाव आने के बाद से बच्चों के साथ-साथ बड़े भी दूषित पानी पीने से बीमार हो रहे हैं।
जीवनगढ़ क्षेत्र में दूषित पानी पीकर काफी संख्या में लोग बीमार हो रहे हैं। इनमें बच्चों की संख्या सर्वाधिक है। शहर के अन्य क्षेत्रों में भी लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। इसकी वजह से दूषित जल जनित बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। मलखान सिंह जिला अस्पताल का बच्चा वार्ड (पीडियाट्रिक वार्ड) भर चुका है। यहां पर 27 बेड हैं, जबकि 37 बच्चों का इलाज किया जा रहा है। बेड के अभाव में गैलरी में लिटाकर बच्चों को उपचार दिया जा रहा है। अधिकतर बच्चे उल्टी-दस्त, बुखार और टाइफाइड से पीड़ित हैं। इसके अलावा, निजी चिकित्सालयों में भी अचानक पीलिया, टाइफाइड और डायरिया के मरीज बढ़ गए हैं।
विज्ञापन

पीडियाट्रिक वार्ड (बच्चा वार्ड) भरा हुआ है, एक-एक बेड पर दो-दो बच्चों को इलाज दिया जा रहा है। हालात को देखते हुए गैलरी में भी 25 बच्चों के इलाज का इंतजाम किया गया है। ओपीडी में प्रतिदिन 150-200 बच्चे पहुंच रहे हैं। ये बच्चे डायरिया, पीलिया व बुखार आदि से पीड़ित होते हैं। -- डॉ. रामकिशन सीएमएस, मलखान सिंह जिला अस्पताल
डिहाइड्रेशन है जानलेवा
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विकास मेहरोत्रा कहते हैं कि बारिश के बाद दूषित जल जनित बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ गई है। जलभराव एवं नलों से दूषित जल की आपूर्ति के कारण बीमारियां होती हैं। सबसे अधिक उल्टी-दस्त एवं पीलिया (हेपेटाइटिस ए) के मरीज आ रहे हैं। यू तो ये सामान्य बीमारी है लेकिन समय पर देखभाल के अभाव में जानलेवा साबित होती है। छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखकर बीमारियों से बचा जा सकता है। घर में आरओ एवं स्वच्छ पानी का इंतजाम न हो तो पानी उबाल कर पीना चाहिए। उल्टी-दस्त होने पर शरीर से पोषक तत्व नमक, सोडियम, पोटैशियम आदि निकल जाते हैं। ऐसे में डिहाइड्रेशन की स्थिति उत्पन्न होती है, जो जानलेवा साबित होती है। लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।
डिहाइड्रेशन के लक्षण
- बच्चों का पेशाब गाढ़ा हो जाना, रोने पर आंख से आंसू न आना, त्वचा का सिकुड़ जाना, तालू बैठ जाना, आंख अंदर जाना, तालू व ओंठ का सूखना और बच्चे का निढाल होना।
विज्ञापन

पीलिया के लक्षण
आंख पीला होना, पेट दर्द, उल्टी, बुखार, भूख न लगना, लिवर से संबंधित समस्या।
जीवनदायी है ओआरएस
डॉ. विकास मेहरोत्रा कहते हैं कि ओआरएस जीवनदायी है। बच्चों को उल्टी-दस्त ज्यादा होने पर तुरंत ओआरएस का घोल देना चाहिए। यह हर जगह उपलब्ध है। ओआरएस घर में न हो तो एक गिलास पानी में एक चम्मच नमक एवं एक चम्मच चीनी मिलाकर बच्चों को पिलाएं।
उल्टी-दस्त होने पर बेटे को भर्ती कराना पड़ा है। अब कुछ ठीक दिख रहा है। टंकी से गंदा पानी आता है। मजबूरी में उसे पीना पड़ता है।
- चंद्रवती, निवासी हीरानगर, खैर रोड (जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में भर्ती 12 वर्षीय राजीव की मां)
उल्टी, दस्त व बुखार होने पर बेटे को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। टंकी से बदबूदार पानी आता है। अक्सर लोग बीमार होते हैं।
- विमलेश, निवासी मेहताब नगला (जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में भर्ती 4 वर्षीय राज की मां)
जमालपुर में पानी की बहुत दिक्कत है। टंकी से गंदा पानी आता है। अब तो लोग टंकी के बदले पानी खरीद कर पी रहे हैं।
- जैतून, निवासी जमालपुर (जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में भर्ती 4 माह की अरीब की मौसी)
21 जून से 20 जुलाई 2021 की जिला अस्पताल की लैब रिपोर्ट
बीमारी कुल जांच बीमार
पीलिया 1999 215
टाइफाइड 762 135
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें