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अलीगढ़ : एक ट्रॉली भूसे के लिए ली थी बच्चे की बलि, फिर अंतर्देशीय चिट्ठी भेजकर मांगी थी फिरौती

Sat, 06 Jun 2020 02:51 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
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टप्पल के गांव मानपुर निवासी माता-पिता अपने मासूम बच्चे का फोटो दिखाते हुए - फोटो : अमर उजाला
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बात 1998 की है। परिवार में सब कुछ ठीक-ठाक था। लेकिर एक ट्राली भूसा देने के लिए पिता ने सौतेले भाइयों राजपाल-चंद्रपाल को इनकार कर दिया। बस उसी बात का बदला लेने के लिए हमारे पांच साल के बेटे अशोक को अगवा कर उसकी बली ले ली। इतना ही नहीं, अब पता चला है कि बेटे की हत्या के बावजूद ये लोग फिरौती के लिए अंतर्देशीय पत्र भेजकर रकम मांग रहे थे। डेढ़ महीने तक हम कहां-कहां नहीं भटके। तत्कालीन मुख्यमंत्री तक को फैक्स किया। बमुश्किल डेढ़ महीने बाद अपहरण मुकदमा दर्ज हुआ। उसमें भी कोई सफलता नहीं मिली तो थक कर बैठ गए। मगर, बृहस्पतिवार सुबह जब सच्चाई सामने आने की खबर मिली तो मन को चैन मिला और रात को सुकून भरी नींद आई।

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यह कहना है जिला मुख्यालय से 65 किमी दूरी पर बसे टप्पल क्षेत्र के गांव मानपुर निवासी किसान दंपती रवि कुमार और रेखा का। जिनके 5 साल के बेटे की वर्ष 1998 में हुए अपहरण के मामले में पुलिस ने अब जाकर हत्या का खुलासा कर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। शुक्रवार को जब टीम अमर उजाला गांव पहुंची, तो वहां इसी मसले पर हर तरफ चर्चाएं चल रही थीं।

परिवार से बातचीत शुरू की तो रवि कुमार ने बताया कि हमारे पिता की पहली पत्नी से दो बेटे राजपाल व चंद्रपाल थे। मां की मौत पर पिता ने अपनी साली यानी राजपाल की मौसी से शादी कर ली, जिनसे हम पैदा हुए। वर्ष 1990 में सौतेले भाई गांव छोड़कर हरियाणा के मेवात में कस्बा सोना के गांव अलीपुर जाकर बस गए। हां, फसल आने पर हर बार आते और पिता उन्हें उनके हिस्से के अनुसार गेहूं आदि देते थे। एक बार उन्होंने एक ट्राली भूसा अतिरिक्त मांग लिया। जिस पर पिता ने इनकार कर दिया। इसी बात पर वे बिगड़ गए। कुछ दिन बाद यानि 19 जून 1998 को सौतेले भाई राजपाल का बेटा मलुआ हमारे घर आया और तीन दिन रुकने के बाद 22 जून की सुबह अचानक अशोक को अगवा कर ले गया।
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जुलाई-अगस्त में मिले फिरौती के तीन अंतर्देशीय पत्र
इसके बाद जुलाई और अगस्त में तीन अंतर्देशीय पत्र मिले, जिनमें पहले पत्र में 90 हजार की और दूसरे व तीसरे में 1-1 लाख की फिरौती मांगी गई और बेटे को हरियाणा बॉर्डर पर मिलने का भरोसा दिया गया। उन पत्रों के आने पर हम घबराए और पुलिस तक गए। मुख्यमंत्री तक को फैक्स भेजा। तब जाकर बमुश्किल मुकदमा दर्ज हुआ।

परिवार ने भी आरोपियों को मरा मान लिया था
परिजनों के मुताबिक, पुलिस ने मेवात जाकर देखा तो वहां सिर्फ चंद्रपाल व उनकी पत्नी कृपाली मिलीं। राजपाल व उनके परिवार का न तो सुराग लगा और न वहां से कोई जानकारी मिली। 1999 में मुकदमे में कृपाली को अपहरण के आरोप में ही जेल भेजकर चार्जशीट लगा दी। तब तक चंद्रपाल की मौत हो चुकी थी। इसके बाद हम लोग भी यह मानने लगे कि कहीं राजपाल या उनका परिवार भी किसी हादसे का शिकार तो नहीं हो गया, क्योंकि उन्होंने अपने रिश्तेदारों तक से रिश्ता तोड़ दिया था। गांव में भी किसी से कोई नाता नहीं रखा। जब तब अदालत से इनके वारंट आते और पुलिस आती, मगर खाली हाथ लौट जाती थी। शुरुआत में कुर्की होने से इनके हिस्से का मकान भी खंडहर में तब्दील हो गया था।

दोनों बहनों की जिद ने परिवार कराया टुकड़े-टुकड़े
मां रेखा हाथ में ढाई साल के अशोक का फाइल फोटो लिए बोलीं कि राजपाल व चंद्रपाल को ब्याही दोनों सगी बहनों ने इस परिवार को टुकड़े-टुकड़े कराया। वही इन दोनों भाइयों को यहां से मेवात लेकर गईं। उन्हीं ने भूसे का विवाद होने पर हमारे बेटे की हत्या कराई। ऊपर वाले ने दोनों को जेल तक भेजा है। अब कृपाली कहां है, इस विषय में किसी को जानकारी नहीं है। अनुमान है कि वह मेवात में ही है।

बोले ग्रामीण--
जो हुआ, सही हुआ है। इस परिवार ने बच्चे की हत्या की है। अब उन्हें सजा मिल रही है। हम अशोक के परिवार के साथ हैं।
- सत्येंद्र सिंह
अब तक तो हम लोग भी यही मान रहे थे कि अशोक के साथ राजपाल परिवार किसी हादसे का शिकार हो गया, मगर अब उसे सजा मिली है, जो सही है।
- देवदत्त
जिसने पाप किया है, उसे सजा जरूर मिलती है। इस केस में भी ऐसा ही हुआ है। राजपाल ने जो किया वह गलत किया है।
- तुलसीराम
बेशक राजपाल ने गांव व रिश्तेदारों से संपर्क तोड़ दिया था। मगर हम लोग यह मानते थे कि हो न हो उसने बच्चे की हत्या कर दी है।
- शीशपाल सिंह

डीएनए जांच की तैयारी शुरू, कृपाली पर भी बनेगा हत्या का चार्ज
इस घटना का 22 साल बाद खुलासा करने वाले इंस्पेक्टर टप्पल आशीष कुमार सिंह ने बताया कि अशोक के परिवार का सैंपल डीएनए जांच के लिए शनिवार को संकलित कराए जाएंगे। जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ भेजा जाएगा। वहीं से रिपोर्ट आने पर तय होगा कि वाकई यह अशोक के अवशेष हैं या किसी और के। अपहरण के आरोप में साक्ष्यों के अभाव में बरी हुई कृपाली के खिलाफ भी हत्या का चार्ज बनाकर पर्चा कोर्ट में पेश किया जाएगा। गिरफ्तार आरोपियों ने कृपाली को भी हत्या में शामिल होना स्वीकारा है। फिर कोर्ट अपने स्तर से कृपाली को तलब करेगी।

पहचानने में लगा पूरा एक दिन
इंस्पेक्टर ने बताया कि राजपाल व उसके परिवार को पहचानने में पूरा एक दिन लगा। जब हमारा मुखबिर सौ फीसद मान गया कि यही राजपाल व उसका परिवार है। तभी इन पर हाथ डाला गया था। लोगों ने भी बताया था कि करीब 20 साल पहले यह परिवार यहां आकर बसा है।

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