महाराष्ट्र के रायगढ़ स्थित रेवदांडा बंदरगाह से तीन किमी दूरी पर डूबे एमवी मंगलम जहाज के चीफ इंजीनियर संतोष कुमार अत्री 22 दिन बाद घर आए तो परिजनों की आंखों से आंसू निकल आए। उनकी खुशी का कोई ठिकाना न था। उस वक्त के हालात के बारे में संतोष कुमार अत्री ने बताया कि एयर लिफ्ट करने से उनके कंधे में मोच आ गई है। अभी तक दर्द नहीं गया है। परिजनों ने शनिवार को डॉक्टर को दिखाने की योजना बनाई है।
16 जून को लौह अयस्क लेकर 16 सदस्यों के साथ एमवी मंगलम जहाज मुंबई से सालाव जेट्टी रेवदांडा के लिए रवाना हुआ था। रेवदांडा बंदरगाह से लगभग तीन किलोमीटर दूर खराब हुए मौसम व ऊंची-ऊंची लहरों के बीच जहाज डगमगाने लगा तो 21 घंटे तक सभी की जान जहाज पर फंसी रही। भारतीय नौसेना द्वारा एयरलिफ्ट कर सभी को बचा लिया गया। शुक्रवार शाम को संतोष कुमार अत्री अपने घर पहुंचे। उनको अपने बीच और सही सलामत पाकर परिजनों की आंखों से आंसू निकल आए। परिवारीजन उन्हें देखकर काफी खुश हुए। सूचना पर रिश्तेदार भी हालचाल लेने पहुंचे।
जट्टारी के उसरहा गांव के हैं चीफ इंजीनियर
चीफ इंजीनयिर संतोष कुमार अत्री जट्टारी के उसरह गांव के मूल निवासी है। परिवार अब खेरेश्वर मंदिर के पास जलालपुर की मेघ विहार कॉलोनी में रहता है। घर पहुंचने पर बेटा भाजयुमो के लोधा मंडल अध्यक्ष इंजीनियर विक्रम सिंह, पत्नी सतेश अत्री, पुत्रवधु सीमा अत्री व पोता विनायक को देखकर काफी खुश हुए। परिवार के साथ काफी समय बिताया।