यूपी बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन।
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रोज की तरह उस दिन भी मैं कॉपियां जांच रहा था। सब ठीक ही चल रहा था। अचानक एक कॉपी पर हाथ रुका, मुझे लगा कुछ तो अलग है। उत्तर पुस्तिका के शुरुआती पेजों और बाद के पन्नों पर लिखावट अलग अलग है। पहले तो मुझे लगा, शायद छात्र की लिखावट बदल गई होगी, लेकिन जब अगली कॉपी उठाई, तो वहां भी ऐसा ही पैटर्न मिला।
यह कहना है बोर्ड परीक्षाओं का मूल्यांकन करने वाले अलीगढ़ के एक शिक्षक का, जिन्होंने दूसरे शिक्षकों के साथ मिलकर सामूहिक नकल का खुलासा किया है। इलाहाबाद से जांच आदेश जारी होने के बाद 25 मार्च देर शाम शिक्षक ने 'अमर उजाला' से बातचीत में पूरी घटना का जिक्र करते हुए बताया कि उस दिन मेरे पास केमिस्ट्री विषय की उत्तर पुस्तिकाएं थीं। जब हैंडराइटिंग अलग अलग मिली तो मैंने दूसरी और फिर तीसरी उत्तर पुस्तिका में लिखावट पर गौर करना शुरू किया।
इस तरह कुल उत्तर पुस्तिकाओं की संख्या 286 पहुंच गई जिसमें से 42 छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं में हैंडराइटिंग अलग अलग थी। कुछ में तो एक जैसी हैंडराइटिंग भी दोहराई गई। उन्होंने कहा, तब तक नौरंगीलाल राजकीय इंटर कॉलेज स्थित मूल्यांकन केंद्र पर मौजूद सभी परीक्षकों को समझ आ गया कि यह एक बड़ी और सामूहिक नकल से जुड़ा मामला है।
इसके बाद मामला उप-प्रधान परीक्षक के संज्ञान में दिया। वहां से जांच के बाद प्रकरण प्रधान परीक्षक और केंद्र प्रभारी रविंद्र पाल तोमर तक पहुंचा। प्रभारी ने भी लिखावट में अंतर की पुष्टि करते हुए सभी संदिग्ध उत्तर पुस्तिकाओं को सील कर यूपी बोर्ड को भेज दिया।
यह जानकारी मिलते ही परिषद के शीर्ष अधिकारियों को अवगत कराया गया। बोर्ड ने तय समय में जांच के निर्देश दिए हैं जिसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. पूरन सिंह, डीईओएस, अलीगढ़