कौशल कुमार ओझा
कोरोना की संभावित तीसरी लहर का खतरा निकट है। लेकिन उसका मुकाबला करने के लिए ग्रामीण क्षेत्र के स्वास्थ्य केंद्र सीएचसी व पीएचसी अभी तैयार नहीं है। स्थिति यह है कि यहां पर सर्दी, खांसी, बुखार, मलेरिया जैसी मौसमी बीमारियों का उपचार भी ठीक से उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। दरअसल, जनपद के अस्पतालों में चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की भारी कमी है। करीब आधा दर्जन पीएचसी पर तो एलोपैथिक चिकित्सक नहीं है। कुछ पीएचसी तो ऐसी हैं, जहां स्टाफ के अभाव में चिकित्सक खुद केंद्र का ताला खोलते हैं।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को मिनी जिला अस्पताल की तरह विकसित किया गया है। मानक के अनुसार, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, निश्चेतक सहित 8 चिकित्सकों की तैनाती होनी चाहिए। हालात यह हैं कि किसी भी सीएचसी में विशेषज्ञ तो दूर, दो से अधिक चिकित्सक नहीं है। इसी तरह स्टाफ की कमी है। पीएचसी की स्थिति तो और खराब है। जनपद में 35 पीएचसी हैं, जिनमें से छह में एलोपैथी के डॉक्टर नहीं हैं। वहां आयुष चिकित्सकों को तैनात किया गया है। तीन-चार पीएचसी तो ऐसी हैं, जहां एक डॉक्टर तो है लेकिन मदद के लिए स्टाफ नहीं है।
सीएमओ बोले, जनपद में चिकित्सकों की कमी है
स्वास्थ्य सेवाओं का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जनपद में सीएमओ के अधीन चिकित्सकों के 213 पद हैं, जिसमें से 155 खाली हैं। 213 में से 108 पद विशेषज्ञ चिकित्सकों के है, जिनमें से अधिकांश रिक्त हैं। सीएमओ डॉ. बीपी सिंह कल्याणी भी स्वीकारते हैं कि जनपद में चिकित्सकों की कमी है। विशेषज्ञ चिकित्सक तो न के बराबर हैं। इस संबंध में शासन को अवगत करा दिया गया है।
...एडी हेल्थ बोले, सभी पीएचसी पर डॉक्टर तैनात
जनपद के सभी पीएचसी पर चिकित्सक तैनात हो गए हैं। एक भी पीएचसी डॉक्टरविहीन नहीं है। कुछ चिकित्सक आयुष से भी लिए गए हैं। हमारे पास विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है। दरअसल विशेषज्ञ चिकित्सक ग्रामीण क्षेत्रों में रहकर सेवा देने को तैयार नहीं होते हैं। हमलोग पूरा प्रयास कर रहे हैं कि ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को अधिकतम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो।
- डॉ. एसके उपाध्याय, एडी हेल्थ
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति बेहद खराब है। तीसरी लहर की कौन कहे सर्दी, खांसी, बुखार, मलेरिया जैसी मौसमी बीमारियों का उपचार भी ठीक से नहीं मिल पाता है।
- लोकेश वार्ष्णेय, अध्यक्ष, लोक कल्याण एवं विकास समिति
कोरोना की तीसरी लहर को लेकर तैयारी कर रहे हैं। अतरौली, खैर, इगलास एवं चंडौस में 10-10 बेड का पीडियाट्रिक आईसीयू (पीकू) बन रहे हैं। तीन पीकू शहर में बन रहे हैं। बाइपैप मशीन एवं ऑक्सीजन कंस्ट्रेटर लखनऊ से आएगा। स्वास्थ्यकर्मियों की ऑनलाइन ट्रेनिंग शुरू हो गई है। जनप्रतिनिधियों द्वारा स्वास्थ्य केंद्रों को गोद लिया गया है। इससे आने वाले समय में सुविधाएं और बेहतर होने की उम्मीद है।
- डॉ. बीपी सिंह कल्याणी, सीएमओ
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति
पीएचसी का ताला खुद खोलते हैं डॉक्टर
तहसील के पीएचसी अंडला, शिवाला और सोफा में सिर्फ एक डॉक्टर तैनात हैं। सहयोग के लिए स्टाफ नहीं है। आलम यह है कि डॉक्टर स्वयं पीएचसी का गेट खोलते हैं। उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं का अनुमान स्वयं लगाया जा सकता है।
सीएचसी अतरौली में बंद है ओपीडी
सीएचसी अतरौली में ओपीडी बंद है। वहां के सभी कर्मचारियों को 100 बेड अस्पताल से अटैच कर दिया गया है। वहां पर प्रसव की सुविधा भी नहीं है। दवाओं का अभाव है। जांच, एक्सरे आदि कुछ भी नहीं है। जबकि 100 बेड अस्पताल एवं सीएचसी का बजट अलग-अलग आता है। सीएमओ का कहना है कि कुछ व्यावहारिक दिक्कतों को देखते हुए सीएचसी के बदले 100 बेड अस्पताल में मरीज देखे जा रहे हैं।
पीएचसी के सामने शराब की दुकान
अतरौली तहसील के जिरौली धूमसिंह पीएचसी के सामने ही अंग्रेजी शराब, देशी शराब एवं बीयर का ठेका है। इस केंद्र को राज्यमंत्री संदीप सिंह ने गोद लिया है। इसकी हालत बहुत खराब है। स्टाफ की कमी है। एक स्टाफ का तो पीएचसी के सामने हॉस्पिटल है। गेट के सामने कूड़े का ढेर है। बरसात में जलभराव होता है। बीमारी फैलने का खतरा रहता है।
लोग कर रहे टीका का इंतजार
क्षेत्र के पीएचसी पर कोविड टीकाकरण का इंतजार लोग कर रहे हैं। धूप में ग्रामीण क्षेत्र के किसान कई किलोमीटर दूर अतरौली एवं बिजौली सीएचसी पर टीका लगवाने जाने से कतराते हैं। फसल की रखवाली भी करनी होती है।
हाईवे किनारे के सीएचसी में रात में नहीं रहते डॉक्टर
सीएचसी गभाना अलीगढ़-गाजियाबाद एक्सप्रेसवे के समीप है। आए दिन हादसे होते रहते हैं। ट्रॉमा सेंटर की बात तो छोड़ दीजिए। दुर्घटना में घायल लोगों को सीएचसी पर बेहतर उपचार भी नहीं मिल पाता है। रात में सीएचसी पर डॉक्टर नहीं होते। मरीजों को अलीगढ़ या प्राइवेट हॉस्पिटल में जाने के लिए कह दिया जाता है।
जनपद में स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या
सीएचसी - 16
पीएचसी - 33
यूपीएचसी - 18