भारतीय संस्कृति के कण-कण में हिंदी रची-बसी है। यह दिन-प्रतिदिन समृद्ध हो रही है, क्योंकि नई पीढ़ी ने मातृ भाषा को पल्लवित करने का बीड़ा उठा लिया है। अलग-अलग विषयों पर अपनी आैर प्रसिद्ध कवियों की कविताएं सुनाकर हाई स्कूल के छात्र-छात्राओं ने यही संदेश दिया कि मातृ भाषा हिंदी के दिन बहुरेंगे। शुक्रवार को अमर उजाला फाउंडेशन के बैनरतले 'हिंदी हैं हम' अभियान के तहत विश्व भारती पब्लिक स्कूल में विद्यार्थियों ने कविता पाठ किया।
शुक्रवार को स्कूल के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने हिंदी का महत्व कविता के माध्यम से बताया। कक्षा 9 की अक्षिता सिंह ने कविता पढ़ी -
‘हिंदी दिवस तो हम रोज मनाते हैं, कन्नड़, मराठी, पंजाबी, हिंदी के ही तो भाग हैं ये, क्या हिंदी के बिना कुछ कर पाते हैं’।
कक्षा 10 की छात्रा अंजलि शर्मा ने कविता में पेड़ों का महत्व बताया। कहा- ‘जीवन सुखी बनाते पेड़, कर देते हैं दूर प्रदूषण, बाढ़ से हमें बचाते पेड़, चलो चलें सब पेड़ लगाएं, हरियाली फैलाते पेड़’।
कक्षा दसवीं की सोनाक्षी ने रंग कर्मी सफदर हाशमी की मशहूर कविता के माध्यम से जीवन में किताबों की अहमियत बताई। कहा- ‘किताबें कुछ कहना चाहती हैं, तुम्हारे पास रहना चाहती हैं, किताबों में झरने गुनगुनाते हैं, परियों के किस्से सुनाते हैं।
कक्षा 10वीं की छात्रा प्राची जौहरी ने सांप्रदायिक सद्भाव पर केंद्रित विनय महाजन की कविता ‘मंदिर-मस्जिद, गिरजाघर ने बांट लिया भगवान को, धरती बांटी सागर बांटा मत बांटो इंसान को’ सुनाई।
कक्षा दसवीं की छात्रा अदिति सिंह ने साहिर लुधियानवी की कविता सुनाई- हम मेहनत वालों ने जब भी मिलकर कदम बढ़ाया, सागर ने रास्ता छोड़ा, पर्वत ने शीश झुकाया, फौलादी हैं सीने अपने फौलादी हैं बाहें, हम चाहंे तो चट्टानों में पैदा कर दें राहें। कार्यक्रम में दसवीं के छात्र हर्षित गाैड़ ने मां के बारे में और तृप्ति पचौरी ने बेटी के बारे में कविताएं सुनाई।
हिंदी भाषा हमारी संस्कृति की प्रतीक है। हिंदी को सभी दुलारें और पुचकारें, क्योंकि यह हमारी मातृभाषा है। हिंदी हैं हम अभियान में बच्चों को प्रतिभाग करवाने के लिए अमर उजाला को बधाई देती हूं।
- सुनीता सिंह, प्रधानाचार्या, विश्व भारती पब्लिक स्कूल