जिला मुख्यालय से मात्र 17 किमी दूर एक गांव में हुई पंचायत में एक अनूठा निर्णय लिया गया। यहां मृत्युभोज की परंपरा को ‘मृत्यु दंड’ दिया गया। कई गांवों के प्रतिनिधियों और प्रधानों की पंचायत ने लंबी बहस के बाद मृत्यु भोज का आयोजन समाप्त करने का फैसला सुनाया। इस फैसले ने न केवल एक कुप्रथा के खात्मे की नींव रखी गई, बल्कि पंचायत के प्रति भी लोगों का नजरिया बदला है।
विकास खंड धनीपुर क्षेत्र में कुरीतियों के खिलाफ एक सामाजिक आंदोलन खड़ा हो रहा है। आंदोलन की अगुवाई भी गांव की ही जनता कर रही है। रविवार को गांव बरकातपुर में क्षत्रिय महासभा के योगेंद्र पाल सिंह के नेतृत्व में एक पंचायत बुलाई गई। इसमें सबसे पहले तो ठा. विजय पाल सिंह के निधन पर शोक प्रकट किया गया।
इसके बाद बरकातपुर के प्रधान सतेन्द्रपाल सिंह, चांदगढ़ी के प्रधान पप्पू, गुरुसिकरन के प्रधान पति राजू चौहान, पूर्व ब्लाक प्रमुख योगेन्द्र पाल सिंह लालू, अलहदादपुर के प्रधान पति अर्जुन सिंह भोलू , सतीश कुमार , सिकन्दरपुर के प्रधान सुशील कुमार आदि ने पंचायत में मृत्युभोज की कुप्रथा को समाप्त करने का प्रस्ताव पेश किया। पंचायत में उपस्थित तीन दर्जन से अधिक गांवों के प्रतिनिधि और प्रभावशाली लोगों ने इस प्रस्ताव पर अपनी अपनी बात रखी। जोरदार बहस के बाद मृत्युभोज की प्रथा को खत्म कर देने पर सहमति बन गई।
पंचायत ने फैसला सुनाया कि अब मृत्युभोज का न तो आयोजन होगा और नहीं ऐसे आयोजन में कोई शामिल होना। क्षेत्र में इसका सख्ती से पालन किया जाएगा। पंचायत में मौजूद लोगों ने मृ़त्युभोज न खाएंगे और नहीं खिलाएंगी की शपथ भी ली। इसके बाद हवन यज्ञ किया गया।
- हम मंगल पर पहुंच रहे हैं लेकिन अमंगलकारी परंपराओं से अभी जकड़े हुए हैं। ऐसी परंपराओं को खत्म करना होगा जो विकास में बाधा हैं।पप्पू प्रधान, चांदगढ़ी