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डाकघर अधीक्षक आत्महत्या: रात से बनाई भूमिका, पत्नी से पूछी संदूक की चाबी, निकाली रायफल और सीने में मारी गोली

Thu, 22 Aug 2024 01:26 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

मृतक के अधिवक्ता छोटे भाई ने बताया कि परिवार में सब कुछ हंसी खुशी चल रहा था। रात 11 बजे टीपी सिंह ने छोटे भाई को फोन किया था। व्हाट्सएप कॉल पर बात करते हुए हालचाल पूछा और फिर किसी प्राॅपर्टी के बैनामे का जिक्र किया। छोटे भाई ने यह भी कहा कि अचानक क्या हो गया आपको?
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विलाप करतीं महिलाएं - फोटो : संवाद
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विस्तार
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बुलंदशहर के प्रधान डाकघर के अधीक्षक त्रिभुवन प्रसाद सिंह उर्फ टीपी सिंह के दिमाग में क्या चल रहा था? इस बात का अंदाजा साथी स्टाफ से लेकर परिवार तक किसी को न था। मगर इतना जरूर है कि उनकी गतिविधियों को याद कर परिवार के सदस्य व साथी अनुमान लगा रहे हैं कि वह रात से ही मन में कुछ गलत पाल बैठे थे। पत्नी का तो इस बात पर रोते हुए बुरा हाल है कि खुद उन्होंने मुझसे ही उस संदूक की चाबी का पता पूछा, जिसमें रायफल रखी थी। अगर जरा भी अंदेशा होता तो शायद जीवन में कभी चाबी न बताती। इसके कुछ देर बाद ही पत्नी को घटना की खबर मिली।

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मां की मौत के तीन माह बाद फिर परिवार में कोहराम
गांव अकरावत निवासी राजवीर सिंह खुद सेवानिवृत्त एपीएम हैं। उनके चार बेटों में टीपी सिंह सबसे बड़े थे। बुलंदशहर से पहले उनकी कन्नौज, उन्नाव आदि जनपदों में तैनाती रही। दूसरे नंबर के प्रेम सिंह गांव में विद्यालय चलाते हैं, जबकि तीसरे नंबर के रामवीर सिंह अधिवक्ता हैं और तहसील में प्रैक्टिस करते हैं। सबसे छोटे मैनपुरी में सरकारी सेवा में हैं। टीपी सिंह ने काफी पहले बच्चों की पढ़ाई लिखाई के इरादे से सुरक्षा विहार कॉलोनी में मकान बनाया था। यहीं से शिक्षामित्र पत्नी स्कूल जाती हैं। अब बच्चे उच्च शिक्षा के लिए बाहर रहने लगे हैं। 30 मई को टीपी सिंह की मां का गांव वाले घर में कूलर में करंट आने से देहांत हो गया था। परिवार उस सदमे से जैसे तैसे उबर पाया था कि अब इस घटना से पहाड़ टूट गया।

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कई वर्षों से नहीं चली रायफल से गई टीपी सिंह की जान

सुरक्षा विहार कॉलोनी वाले घर पर बिलखते हुए पत्नी और बेटे की मौत पर गमजदा पिता व पोस्टमार्टम हाउस पर मौजूद अधिवक्ता छोटे भाई ने बताया कि परिवार में सब कुछ हंसी खुशी चल रहा था। रात 11 बजे टीपी सिंह ने छोटे भाई को फोन किया था। व्हाट्सएप कॉल पर बात करते हुए हालचाल पूछा और फिर किसी प्राॅपर्टी के बैनामे का जिक्र किया। छोटे भाई ने यह भी कहा कि अचानक क्या हो गया आपको? कोई बात है क्या? क्यों पूछ रहे हो। मगर टीपी सिंह ने जवाब नहीं दिया। इसी तरह जब घर आए तो पत्नी से खाना बनने की बात पूछकर समय से स्कूल जाने की हिदायत दी। कुछ देर बाद ही पत्नी से फोन पर पूछा कि रायफल वाले संदूक की चाबी कहां रखी है। पत्नी ने भी सामान्य भाव से जवाब दे दिया। मगर किसी को नहीं पता था कि जो रायफल काफी समय से नहीं चली है। वही आज टीपी सिंह की जान ले लेगी। यह रायफल पैतृक पते पर टीपी सिंह के नाम दर्ज लाइसेंस पर खुद उन्होंने खरीदी थी।



अलीगढ़ में किसी को न लगी भनक, बुलंदशहर पहले पहुंची खबर
हैरान करने वाली बात है कि आत्महत्या का सुसाइड नोट वायरल होने के चलते अलीगढ़ में इसकी किसी को भनक तक नहीं लगी। जब साथियों ने यह नोट देखा तो फोन मिलाना शुरू किया। जब टीपी सिंह से संपर्क नहीं हुआ तो एक साथी ने उनके पिता का फोन मिलाया। इसके बाद पत्नी से बात हुई। तब सभी लोग सुरक्षा विहार पहुंचे। जहां अंदर से दरवाजा बंद था। इस पर पुलिस बुलाई गई। तब जाकर घटना से पर्दा उठा। सूचना पर सभी भाई और बच्चे भी यहां पहुंच गए। दोपहर में पोस्टमार्टम के बाद शव गांव ले जाया गया। जहां शाम को अंतिम संस्कार किया गया।



घटनाक्रम एक नजर में
- रात 11 बजे तक सीबीआई पूछताछ के बाद कमरे पर पहुंचे टीपी सिंह।
- सुबह 05 बजे अचानक बिना मकान स्वामी को बताए निकले
- सुबह 06 बजे अपने घर पर पहुंचकर पत्नी से बातचीत की
- सुबह 07 बजे पत्नी को समय से स्कूल जाने की बात कहकर भेजा
- सुबह 07:40 बजे व्हाट्सएप ग्रुप पर सुसाइड नोट को वायरल किया
- सुबह करीब 08 बजे साथियों ने फोन मिलाना शुरू किया, फोन नहीं मिला
- सुबह 9:15 बजे पुलिस को इस घटना की सूचना मिली, पुलिस पहुंची
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