निगरानी में जुटी पुलिस, 20 फीसदी काम शेष
सख्त नियमों के बावजूद अपराधियों तक अवैध कारतूसों का पहुंचना चिंताजनक है। यह वर्तमान निगरानी तंत्र में गंभीर खामियों को दर्शाता है। सत्यापन प्रक्रिया उतनी प्रभावी नहीं हो सकती जितनी होनी चाहिए। इसे लेकर जिला स्तर पर शस्त्र लाइसेंसों का पुलिस द्वारा नए सिरे से सत्यापन कराया जा रहा है। इस अभियान में अभी 20 फीसदी लाइसेंसों का सत्यापन शेष है। कुछ लाइसेंसी ऐसे भी सामने आए हैं, जो जिले से बाहर चले गए हैं। पुलिस अब उनके नए पते की जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही है। इसका उद्देश्य हर हथियार धारक का विवरण पुलिस के पास रखना है। इससे अवैध कारतूसों की निगरानी और बढ़ाई जा सकेगी।
जिस घर में मिला अवैध कारतूस-हथियार, पूरा परिवार जिम्मेदार
पुलिस अधीक्षक नीरज जादौन ने बताया कि उनकी टीमें लगातार इस दिशा में निगरानी कर रही हैं। इसी का परिणाम है कि लगातार अवैध कारतूस व हथियार पकड़े जाते हैं। आर्म्स अधिनियम की धारा 35-1959 के तहत यह प्रावधान है कि जिस घर में अवैध हथियार व कारतूस मिलता है, वह पूरा परिवार जिम्मेदार होता है। परिवार के सभी सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है। इस दिशा में सख्ती बरतने के लिए अब इस कार्रवाई पर भी विचार किया जाएगा। पुलिस कारतूस आने की कड़ी में तीसरी व चौथी परत तक पहुंचने का प्रयास करेगी। इसका लक्ष्य अवैध कारतूसों की आमद को पूरी तरह रोकना है।
इन आंकड़ों पर नजर डालिये
- 37 हजार के करीब लाइसेंसी शस्त्र हैं जिले में
- 900 कारतूस पुलिस की अनुमति से छह माह में बिके
- 400 के करीब कारतूस एक वर्ष में जिला पुलिस ने किए बरामद
- 240 अपराध आर्म्स एक्ट में एक वर्ष में किए गए जिले में दर्ज
- 283 अवैध हथियार इस आर्म्स एक्ट के तहत किए हैं बरामद