भाजयुमो नेता मुकेश सिंह ने फर्म स्वामी अपनी मां सर्वेश कुमारी की ओर यह अर्जी दायर की है। जिसमें कहा है कि वे साझीदार सुमित माथुर संग फर्म चलाते हैं, जिनके खाते सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया शाखा में हैं। इस बैंक में हुए गबन की जानकारी पर वे कई बार बैंक अधिकारियों व पुलिस अधिकारियों से मिले हैं। उन्होंने अपने खातों की पिछले कई वर्ष से एक-एक लेनदेन की जानकारी जुटाई है, जिसकी रिसीविंग भी बैंक की ओर से दी गई है।
अलीगढ़ के नौरंगाबाद की सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया शाखा में हुए गबन मामले में पुलिस स्तर से मदद न मिलने पर भाजयुमो के पूर्व जिलाध्यक्ष मुकेश सिंह ने कोर्ट की शरण ली है। उन्होंने न्यायालय में बैंक के चार अधिकारी, कर्मचारियों के खिलाफ अर्जी दायर कर मुकदमे का अनुरोध किया है और अपनी रकम वापस दिलाने की गुहार लगाई है।
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उन्होंने अर्जी में बैंक की ओर से प्राप्त रिसीविंग के आधार पर बताया है कि उनकी साझेदारी वाली फर्मों के खाते से करीब सवा छह करोड़ रुपये गायब हैं। अदालत ने मामले में पुलिस से रिपोर्ट तलब की है। वहीं उन्होंने इस पूरे मामले में बैंक लोकपाल तक को शिकायत भेजी है। जिसमें बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों की मिलीभगत का अंदेशा जताया है।
भाजयुमो नेता मुकेश सिंह ने फर्म स्वामी अपनी मां सर्वेश कुमारी की ओर यह अर्जी दायर की है। जिसमें कहा है कि वे साझीदार सुमित माथुर संग फर्म चलाते हैं, जिनके खाते सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया शाखा में हैं। इस बैंक में हुए गबन की जानकारी पर वे कई बार बैंक अधिकारियों व पुलिस अधिकारियों से मिले हैं। उन्होंने अपने खातों की पिछले कई वर्ष से एक-एक लेनदेन की जानकारी जुटाई है, जिसकी रिसीविंग भी बैंक की ओर से दी गई है। तमाम जांच पड़ताल व तथ्यों से साफ है कि उनके खातों से सवा छह करोड़ रुपया गायब है।
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अब बैंक में यहां से लेकर क्षेत्र स्तर तक न तो कोई रुपया वापसी पर बात कर रहा और न पुलिस मुकदमे को सुन रही, जबकि पुलिस को सभी साक्ष्य मुहैया करा दिए हैं। हालांकि पुलिस उन साक्ष्यों की जांच की बात कह रही है। मामले में उन्होंने मुकदमे का अनुरोध किया है। जिस पर अदालत ने पुलिस से रिपोर्ट मांगी है। मामले में जुलाई की तारीख नियत है।
गबन की सही जांच हो तो 10 करोड़ का गोलमाल
मुकेश सिंह बताते हैं कि बैंक में गबन के बाद उन्होंने दिन रात एक कर खातों की जानकारी जुटाई है। जिसमें उनके खातों के अलावा अन्य लोगों के खातों से कुल गबन की रकम 10 करोड़ से अधिक होगी। वे बताते हैं कि उनके खाते इस बैंक के सबसे बड़े खाते रहे हैं। इसलिए बैंक मैनेजर उनको भरोसे में रखता था। उनके खातों से रुपया अन्य खातों में गया भी है और आया भी है। उनकी चेकबुक तक उन्हें नहीं मिलीं। फिर भी उन खातों से लेनदेन हुआ है। कथित बैंक मित्र द्वारा खुद पर आरोप लगाकर गायब होने के बाद वे कहते हैं कि पुलिस की हर जांच और हर सवाल का जवाब देने को तैयार हैं। पुलिस स्तर से सुनवाई न होने पर अदालत व बैंक लोकपाल में शरण ली है।