कैप्टन आरपी पचौरी बताते हैं कि 2021 में योजना भवन लखनऊ में मोटे अनाज पर (मिलेट) पर एक गोष्ठी थी। इसमें उन्हें भी बुलाया गया। वह घर से माता जी से बाजरा का एक व्यंजन तैयार कर ले गए, जिसका स्वाद सभी को भाया। उस समय अधिकारियों ने उन्हें इस पर काम करने के लिए कहा। इसके बाद हैदराबाद स्थित इंडियन मिलेट्स इंस्टीट्यूट से ट्रेनिंग ली। साल 2022 में प्रदेश के श्रेष्ठ एफपीओ का पुरस्कार मुख्यमंत्री ने कोमालिका को दिया था। इससे जुड़े 1500 किसानों में 500 से अधिक महिलाएं हैं। ये सभी शेयरधारक हैं। करीब 100 हेक्टेयर भूमि में बीज और मोटे अनाज की खेती की जा रही है।
एफपीओ कोमालिका ने बीज उत्पादन के साथ मिलेट्स पर काफी अच्छा काम किया है। इनके प्रोडक्ट की काफी मांग हो रही है। प्रदेश सरकार से भी सराहना मिली है।-बलजीत सिंह, उप निदेशक उद्यान
कैप्टन आरपी पचौरी बताते हैं कि मोटे अनाज से बनने वाली 79 रेसिपी तैयार की हैं। ज्वार-बाजरे की बालू शाही और रसगुल्ला काफी पंसद किया जाता है।फिलहाल इसे वह आर्डर पर बनाते हैं। सरकारी बैठकों और कार्यक्रमों में भी उन्हें उनके उत्पादों के आर्डर मिलते हैं। फिलहाल अलीगढ़ के अलावा इगलास, बुलंदशहर, खुर्जा और डिबाई में उनके उत्पादों जा रहे हैं। हाल ही में नोएडा में हुए एक्सपो में दिल्ली और नोएडा से भी आर्डर मिले हैं।
मोटे अनाज से बनाएंगे नूडल्स, बर्गर और ब्रेड
कोमालिका फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी की योजना ज्वार-बाजरा, रागी,कोदो सांवा आदि से नूडल्स, पाश्ता, बर्गर, पिज्जा, चाऊमिन और ब्रेड बनाने की है, जिससे आज की पीढ़ी को स्वाद के साथ फाइबर, प्रोटीन, विटामिन और खनिज भी भरपूर मिले। अलीगढ़ शहर में अगले साल तक ऐसा रेस्टोरेंट खोलने जा रहे हैं, जिसमें सभी व्यंजन मिलेट्स यानी मोेटे अनाज के ही होंगे।