17वीं विधानसभा के लिए जिले की दो प्रतिष्ठापूर्ण सीट बरौली और अतरौली में जबरदस्त मुकाबला हुआ। चुनाव से ऐन पहले रालोद का दामन छोड़कर भाजपा में आए ठा.दलवीर सिंह ने बरौली फिर जीतकर और राजस्थान के राज्यपाल के पौत्र संदीप सिंह ने अतरौली जीत कर कई रिकार्ड बनाए हैं। बरौली में 12वीं बार फिर इतिहास रचा गया और जीत का सेहरा ठाकुर बिरादरी से ही ताल्लुक रखने वाले दलवीर सिंह के सिर बंधा है।
इसी तरह अतरौली से संदीप सिंह ने सीट वापस अपने घर में लाकर जिले के सबसे युवा विधायक बनने का ताज पहना है।
बात बरौली से शुरू करें तो 2002 और 2007 के चुनाव में इस सीट पर लगातार दो बार ठा. जयवीर सिंह विजयी रहे थे। उन्होंने दोनों बार अपने निकटतम प्रतिद्वंदी रालोद के पूर्व मंत्री ठा.दलवीर सिंह को हराया था। इससे पहले 1991 में सुरेंद्र सिंह चौहान को हराकर और 1996 में भाजपा के मुनीष गौड़ को हराकर दलवीर सिंह ने विधानसभा का रास्ता तय किया था।
इसके बाद 2012 में वह रालोद से चुनाव जीते। इस बार वह लगातार दूसरी बार चुनाव जीते हैं और इस सीट से लगातार दूसरी बार विधायक बनने वाले तीसरे नेता बने हैं। इससे पहले सुरेंद्र सिंह चौहान, जयवीर सिंह लगातार दो बार विधायक रहे हैं। वहीं दलवीर सिंह ने चौथी बार विधायकी जीतकर सुरेंद्र सिंह चौहान की बराबरी हासिल की है।
बात अतरौली पर करें तो 50 वर्षों में दस बार विधायक रहे कल्याण सिंह की सीट पिछली दफा उनके परिवार से खिसक गई थी। उनकी पुत्रवधू को सपा के वीरेश यादव ने रिकार्ड मतों से हराया था। मगर इस बार उनके पौत्र संदीप ने रिकार्ड मतों से जीत हासिल कर सीट अपने बाबूजी की झोली में डाली है। प्रदेश में अतरौली सीट कल्याण सिंह के नाम से ही जानी जाती है।