शिया धर्मगुरु मौलाना सैयद कल्बे जव्वाद नकवी ने कहा कि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग में डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति के विरोध के पीछे चयन में नाकाम अभ्यर्थियों का हाथ है।
उनका कहना है कि इस विभाग में डॉ. फिरोज का चयन गर्व की बात है। एक मुसलमान ने सबको पछाड़कर अपनी योग्यता साबित की है। उन्होंने कहा कि अयोध्या मामले में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने से देश का माहौल खराब होगा।
मौलाना कल्बे जव्वाद शुक्रवार को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के धर्मशास्त्र संकाय एवं शहर के धौर्रा स्थित एक शैक्षणिक संस्थान में में पहुंचे थे। उन्होंने फोन पर बातचीत में कहा कि लोग कहते हैं कि संस्कृत मातृभाषा है। यह हर जबान की मां है। जबान को बांटना ठीक नहीं है। यह उचित नहीं है कि संस्कृत को सिर्फ हिंदू एवं उर्दू को सिर्फ मुसलमान पढ़ाएं।
ऐसा हुआ तो अरबी के लिए अरब से और अंग्रेजी पढ़ाने के लिए अंग्रेज को बुलाना पड़ेगा। अयोध्या मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के विरुद्ध पुनर्विचार याचिका दाखिल करने के ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के निर्णय से मौलाना जव्वाद सहमत नहीं हैं। इससे माहौल खराब होगा।
उनका कहना है कि बोर्ड को सर्वोच्च न्यायालय का फैसला स्वीकार कर लेना चाहिए। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के नेता मुसलमानों की तरक्की के बारे में सोचे। अयोध्या मुद्दा अब खत्म हो जाना चाहिए। आपस में मिलकर मुहब्बत से रहना चाहिए। हम सभी एक परिवार के सदस्य हैं। इसी में परिवार की भलाई है।
मौलाना जव्वाद को ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी, फारसी विश्वविद्यालय द्वारा डी-लिट् की मानद उपाधि दिए जाने पर मुस्लिम यूथ एसोसिएशन के अध्यक्ष मो. आमिर रशीद एवं अन्य प्रशंसकों ने मुबारकबाद दी।