जवाहर पार्क 17 हेक्टेयर जमीन पर बना है। यह पूरी भूमि उद्यान विभाग के नाम है। यहां उद्यान विभाग की हाईटेक नर्सरी, बेर, अमरूद, आंवला आदि के बाग हैं। लंबे समय से यहां लोग टहलने आते हैं। 2012 में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति बनाई गई, जिसकी बैठक में पार्क में प्रवेश के लिए पहली बार शुल्क लेने की व्यवस्था हुई। पहली बार एक रुपया शुल्क लगाया गया। 2024 तक यह शुल्क 20 रुपये तक पहुंच गया। रविवार और अवकाश के दिन 50 रुपये शुल्क लिया जाने लगा। हालांकि हाईकोर्ट का निर्णय आने के बाद यह शुल्क 5 रुपये प्रतिदिन कर दिया गया है।
सुबह और शाम को रहती है लोगों की भीड़
जवाहर पार्क में सुबह और शाम को लोगों की भीड़ रहती है। रविवार तथा अन्य अवकाश के दिनों में सुबह से शाम तक पार्क भरा रहता है। झूले भी ओवरलोड हो जाते हैं। छमता से अधिक बच्चे झूलों पर सवार दिखाई देते हैं।
पूरी जमीन उद्यान विभाग की है। पांच साल के लिए स्मार्ट सिटी को कुछ स्थान पार्क के साैंदर्यीकरण के लिए दिया है। बाग टहलने के लिए नहीं हैं। समय-समय पर वहां साफ-सफाई की जाती है। अन्य सुधार के लिए बजट की डिमांड भेजी गई है।
- शिवानी तोमर, जिला उद्यान अधिकारी
उद्यान विभाग से बागों की साफ-सफाई के लिए कई बार कहा गया है, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। बारिश में पेड़ गिरने पर कंपनी की ओर से ही उद्यान विभाग की मशीन ठीक कराकर पेड़ हटवाया गया। आवारा कुत्ते लोगों को परेशान करते हैं, जिसकी जानकारी उद्यान विभाग और नगर निगम को दी है।
- साबिर, सुपरवाइजर ओम साईं कंपनी (स्मार्ट सिटी)
शुल्क कम होने से लोगों के चेहरे खिले
25 साल से पार्क में टहलने आ रहे हैं। जुलाई माह में 1000 रुपये देकर पार्क में आने का पास बनवाया था। पार्क में काफी हालात सुधरे हैं। पार्किंग की व्यवस्था होनी चाहिए।
- जवाहर लाल, सेंटर प्वाइंट
जवाहर पार्क में शुल्क नहीं लगना चाहिए। यह सरकारी पार्क है, जहां शुल्क लगाना गलत है। पार्किंग की सुविधा बढ़ानी चाहिए। पार्क में कुत्तों को घुसने से रोकना चाहिए।
- इंजी. हबीब अहमद, फ्रेंड्स कॉलोनी
पार्क में बच्चों के साथ आए हैं। सभी ने पांच-पांच रुपये का टिकट लिया है। पार्क में आकर अच्छा लगा। कुत्तों को रोकना चाहिए। बच्चों को डर लगता है।
- रश्मि गुप्ता, सिविल लाइन