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कभी न भूल पाऊंगी: ड्रोन मिसाइलों का हमला देखा तो पहुंची डमरू वाले के दरबार, अचानक बदला हवाई रूट, तब बची जान

Fri, 17 May 2024 07:44 PM IST
चमन शर्मा आशीष निगम, अमर उजाला, अलीगढ़

सार

हवाई जहाज में 20 स्टाफ कर्मियों सहित लगभग 400 लोग सवार थे। जहाज को ईरान-ईराक के हवाई क्षेत्र से गुजरना था, लेकिन सुबह 3.44 बजे जब अचानक ईरान ने इस्त्राइल पर ड्रोन मिसाइलों से हमला कर दिया तो रास्ता बदला गया। 
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डमरू वाले का आभार जताने केदारनाथ धाम पहुंचे विभा और अमित - फोटो : स्वयं
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विस्तार
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कई देशों में हो रहे अलग-अलग युद्धों से हवाई यात्राएं लगातार प्रभावित हो रही हैं। बीती 13 अप्रैल की सुबह जब ईरान ने इस्त्राइल पर अचानक ड्रोन मिसाइलों से हमला किया था, उस वक्त फ्रैंकफर्ट से दोहा जा रही कतर एयरलाइंस का हवाई रूट अचानक बदला गया था। इससे हवाई जहाज में सवार क्रू मेंबर विभा अग्रवाल सहित स्टाफ के लोग सकते में आ गए थे। रूट बदलने के बाद वह सऊदी के रास्ते से दोहा पहुंचे तो जान में जान आई। विभा ड्यूटी के बाद जब वापस अलीगढ़ पहुंची तो सीधे श्रीकेदारनाथ धाम चलीं गईं। वहां अपने ईष्ट के दर्शन किए और ऊपर वाले को जान बचाने का धन्यवाद दिया। 

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ओजोन सिटी के बी-125 निवासी विभा अग्रवाल कतर एयरलाइंस में बतौर क्रू मेंबर कार्यरत हैं। वह अस्थायी तौर ड्यूटी के दौरान दोहा में भी रहती हैं। बीती 13 अप्रैल की रात को वह फैंक्रफर्ट से दोहा के लिए बोइंग-707 प्लेन में स्टाफ के साथ क्रू मेंबर थीं। हवाई जहाज में 20 स्टाफ कर्मियों सहित लगभग 400 लोग सवार थे। जहाज को ईरान-ईराक के हवाई क्षेत्र से गुजरना था, लेकिन सुबह 3.44 बजे जब अचानक ईरान ने इस्त्राइल पर ड्रोन मिसाइलों से हमला कर दिया तो रास्ता बदला गया। 
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उन्हें सऊदी अरब होते हुए जाना पड़ा। रास्ता बदलने की खबर केवल स्टाफ सदस्यों को थी, मुसाफिरों को नहीं ताकि जहाज में दहशत न फैले। जब जहाज दोहा पहुंचा तो स्टाफ कर्मियों ने राहत की सांस ली। विभा कहतीं हैं कि उन्होंने खुद ड्रोन मिसाइलों का हमला देखा था, प्लेन से चमकती हुई मिसाइलें दिख रहीं थीं। इसलिए वह सहम गईं थीं। इसकी जानकारी उसी वक्त उन्होंने अपने पायलट पति अमित को दी थी, जो उस वक्त अलीगढ़ में थे। 
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ड्यूटी के बाद वापस अलीगढ़ आने पर वह पति के साथ केदारनाथ धाम पहुंचीं और जान बचाने के लिए अपने ईष्ट डमरू वाले को धन्यवाद दिया। वह कहती हैं कि इससे पहले भी दो बार उनकी हवाई यात्राओं के दौरान हमलों के कारण रास्ता बदला गया था, लेकिन उस वक्त उन्होंने हमला होते हुए नहीं देखा था, इसलिए ज्यादा नहीं डरीं थीं। इस बार मिसाइलों को देख कर वह डर गईं थीं। विभा अब फिर अलीगढ़ से वापस दोहा पहुंच गईं हैं। फिर से एक नई ड्यूटी के लिए..। 
                            

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