गजल को बनाया बनाया अमर
एएमयू में शहरयार के साथी साहित्य एकेडमी अवार्ड से सम्मानित प्रो. शाफे किदवई ने कहा कि यूं तो आशा भोंसले पाश्चात्य संस्कृति पर आधारित गीतों को आवाज देती थी, लेकिन पहली बार शहरयार की गजलों को उन्होंने आवाज देकर उसे अमर बना दिया। प्रो. शाफे किदवई ने कहा कि “शहरयार ने एक बार बताया था कि आशा भोंसले ने कहा था कि आपकी गजलों से उन्हें एक पहचान मिली है”।
जिक्र होते ही खिल जाते थे शहरयार
शहरयार के अभिन्न मित्रों में से एक डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि “अचानक मैं पूछ बैठा था उमराव जान की काबिले जिक्र और काबिले तारीफ की कामयाबी की वजह आप क्या मानते हैं। हमेशा की तरह उमराव जान का जिक्र आते ही वह खुश होते दिखने लगे। अजीब का एक संकोच, खूबसूरत सा एक गर्व, आंखों में चमक, चेहरा खिला-खिला, रोम-रोम में खुशी, तृप्ति प्रकट होने को मचलती थी। उनकी गजलों को आशा भोंसले की दमदार और शानदार आवाज की बदौलत खूब प्रसिद्धि मिली।
दिल में है जिंदा मखमली आवाज
शायर जॉनी फाॅस्टर ने कहा कि आशा भोंसले की आवाज हमारे दिल-ओ-दिमाग में आज तक जिंदा है। उनका नाम उनकी मखमली आवाज के लिए इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो चुका है। खास तौर पर उमराव जान में गाई हर गजल ने उनको खास प्रसिद्धि दिलाई। अलीगढ़ का महत्व इस बात से बढ़ जाता है कि ये सारी गजलें शहरयार की कलम से निकलीं थीं।