कटे वोटों में 60-40 की खेमेबंदी
सियासी आंकड़ों के जानकार कहते हैं कि जिले की शहर व कोल सीट का चुनाव हमेशा धार्मिक ध्रुवीकरण के आधार पर होता रहा है। दोनों सीटों पर पर जो वोट कटे हैं, उनमें 60 फीसदी का आंकड़ा एक पक्ष से समर्थित है। वहीं 40 फीसदी का आंकड़ा दूसरे पक्ष से समर्थित होने का अनुमान है।
एसआईआर की सूची हमें मिल गई है। अब उसमें किस तरह के बदलाव हुए हैं और कितना हानि लाभ हुआ है, इसके लिए बूथवार रविवार को समीक्षा होगी। उसमें हमारी पार्टी की ओर से एक परफार्मा मिला है, जिसके अनुसार मिलान कराया जाएगा। उम्मीद है कि कहीं गड़बड़ नहीं हुई होगी। कुछ कमियां होंगी तो उन्हें दुरुस्त कराया जाएगा। - कृष्णपाल सिंह लाला, जिलाध्यक्ष भाजपा
एसआईआर की सूची जारी हुई है। हमारी पार्टी अपनी विधानसभा कमेटी के माध्यम से बूथ स्तर पर सूची का अवलोकन करेगी और देखेगी कि कहीं अनियमितता तो नहीं हुईं। अगर ऐसा हुआ तो पार्टी सुप्रीमो के माध्यम से आपत्ति दर्ज कराई जाएगी। - रतन दीप सिंह जिलाध्यक्ष बसपा
एसआईआर में विपक्ष के वोट कटे हैं। यह प्रक्रिया सरकार के दबाव में जल्दीबाजी में कराई है। 2022 की मतदाता सूची के नाम भी इस सूची से बाहर हैं। निर्वाचन आयोग और अधिकारी सरकार का फरमान मानने को मजबूर रहे। अब हमारी मांग है कि जो भी नाम कटे हैं, वह 2027 के चुनाव से पहले जोड़े जाएं। - सोमवीर सिंह, जिलाध्यक्ष कांग्रेस
एसआईआर प्रक्रिया पक्षपातपूर्ण एवं अनियमिततापूर्ण रही है। सपा समर्थक मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। चुनाव आयोग निष्पक्षता सुनिश्चित करने में विफल रहा है। भाजपा ने चुनाव में हार के डर और हताशा में चुनाव आयोग से हाथ मिलाया। यूपी की जनता ने जैसे 2024 में भाजपा को हराया था उसी तरह से 2027 में हराएगी। - लक्ष्मी धनगर, जिलाध्यक्ष, सपा