कम मात्रा में कम नुकसान
वैज्ञानिकों ने पाया कि 0.0025 मिलीग्राम प्रति लीटर की सबसे कम मात्रा पर मछलियों में बहुत कम प्रभाव दिखाई दिए। इससे स्पष्ट होता है कि दवा की सांद्रता बढ़ने के साथ उसका विषैला प्रभाव भी तेजी से बढ़ता है। अगर एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग और अपशिष्ट जल के निस्तारण पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। इसका असर केवल मछलियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खाद्य शृंखला के माध्यम से मानव स्वास्थ्य भी प्रभावित हो सकता है। इस पर डॉ. हुमा वसीम, चांदनी, अब्दुर रऊफ समीम की रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय जर्नल स्प्रिंग नेचर में छपी है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
विशेषज्ञ डॉ. हुमा वसीम के अनुसार, एंटीबायोटिक दवाओं का जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग, अस्पतालों और पशुपालन इकाइयों के अपशिष्ट जल का वैज्ञानिक उपचार और जल स्रोतों की नियमित निगरानी समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। तभी जलीय जैव विविधता और पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सकेगा।