फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

संघर्ष का दूसरा नाम है ‘कल्याण’

विज्ञापन
मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार अतरौली पहुंचे और राजकीय महिला चिकित्सालय का उद्घाटन किया। साथ ? - फोटो : CITY OFFICE
विज्ञापन
कौशल कुमार ओझा, अलीगढ़।
विज्ञापन

कल्याण सिंह का सारा जीवन संघर्षों से भरा रहा । दो बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने लेकिन पद पर बने रहने के लिए कभी समझौता नहीं किया। अयोध्या में कार सेवकों पर गोली चलवाने से इंकार कर दिया और विवादित ढांचे के विध्वंस की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री पद को ठोकर मार दी। हालांकि, भव्य मंदिर में विराजमान रामलला के दर्शन करने की उनकी इच्छा अधूरी ही रह गई।
जिले की अतरौली तहसील के मढ़ौली गांव में एक साधारण किसान परिवार में जन्मे कल्याण सिंह प्रदेश की राजनीति के शिखर पर पहुंचे। बचपन से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की शाखाओं में जाते थे। उच्च शिक्षा हासिल कर अतरौली के एक इंटर कॉलेज में अध्यापक बन गए।
विज्ञापन

1967 में पहली बार अतरौली से विधायक बने और 1980 तक लगातार विधान सभा सदस्य रहे। आपताकाल के दौरान 21 महीने तक अलीगढ़ एवं बनारस की जेल में रहे। 1980 में भाजपा के गठन के बाद प्रदेश संगठन महामंत्री बनाए गए। इस दौरान गांव-गांव घूमकर भाजपा की जड़ें मजबूत कीं। अब विशाल वट वृक्ष बन चुकी इस पार्टी को कल्याण सिंह एवं इनके सहयोगियों ने ही शुरूआती दिनों में सींचा था।
राममंदिर आंदोलन में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। उसके बाद ही देश में भाजपा का उभार हुआ था। 1991 में प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी तो कल्याण सिंह मुख्यमंत्री बने। कल्याण सिंह के साथ आपातकाल के दौरान जेल जा चुके राजेंद्र वार्ष्णेय चीफ कहते हैं कि बाबूजी (कल्याण सिंह) ने विवादित ढांचा विध्वंस की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए नौ दिसंबर 1992 को मुख्यमंत्री पद को ठोकर मार दी थी।
वह देश में हिंदुत्ववादी चेहरा बनकर उभरे। 1997 से 1999 तक दूसरी बार मुख्यमंत्री रहे। 1999 में मतभेद होने पर भाजपा को छोड़कर राष्टीय क्रांति पार्टी का गठन किया। 2004 में अटल बिहारी वाजपेयी की मौजूदगी में भाजपा में पुन: वापसी हुई। उसी वर्ष बुलंदशहर से जीतकर पहली बार संसद में पहुंचे।
यथोचित सम्मान नहीं मिलने से आहत कल्याण 2009 में दूसरी बार भाजपा को छोड़कर मुलायम सिंह यादव के करीब पहुंचे। उसी वर्ष एटा से निर्दलीय निर्वाचित होकर दूसरी बार सांसद बने। हालांकि बाद में मुसलमानों की नाराजगी की वजह से मुलायम सिंह यादव ने कल्याण सिंह ने किनारा कर लिया।
विज्ञापन

कल्याण सिंह राष्ट्रीय जनक्रांति पार्टी का गठन कर 2012 के विधान सभा चुनाव में कूद गए। राजेंद्र वार्ष्णेय चीफ कहते हैं कि पार्टी छोड़ने से कल्याण एवं भाजपा दोनों को नुकसान हुआ। 2013 में कल्याण सिंह की पुन: भाजपा में वापसी हुई। नरेंद्र मोदी के कहने पर 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश में भाजपा का चुनाव प्रचार किया। भाजपा को लोकसभा की 80 में से 71 सीटों पर जीत हासिल हुई।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें