सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) आगरा की जांच में आय से अधिक संपत्ति में आरोपी पाए गए नगर पालिका अतरौली के सेवानिवृत्त निर्माण लिपिक नानक चंद्र पहले से विवादों में रहे हैं। उन पर नगर पालिका कार्यालय के नीचे बनी दुकानों के आवंटन में गड़बड़ी के मामले में वर्ष 2021 में रिपोर्ट दर्ज हुई थी।
इसके अलावा नगर पालिका की दुकानों को अपने परिजनों के नाम आवंटित कराने की आरटीआई कार्यकर्ता अंशुल भारद्वाज ने शिकायत की थी, जिसकी जांच चल रही है।
नगर पालिका के सूत्रों का कहना है कि नानक चंद्र पालिका के अधिकारियों के इतने विश्वासपात्र थे कि वर्ष 2017 में सेवानिवृत्त होने से पहले करीब 20 वर्ष तक निर्माण लिपिक के पटल पर ही बने रहे। इस दौरान कई बार पालिका का प्रशासन बदला। जेई और अधिशासी अधिकारी बदले लेकिन किसी ने उनका पटल परिवर्तन नहीं किया। सेवानिवृत्त होने के बाद से वह परिवार के साथ गैर जनपद में रह रहे हैं।
बताते चलें कि विजिलेंस आगरा के निरीक्षक रामवीर सिंह ने उन पर आय से अधिक संपत्ति की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में आरोप है कि लोकसेवक के रूप में कार्यरत रहते हुए नानक चंद्र की सरकारी सेवा से 32 लाख 63 हजार रुपये की आय हुई, जबकि सेवानिवृत्त लिपिक ने 54 लाख 32 हजार रुपये की संपत्तियों की खरीद सहित अन्य खर्च किए। ऐसे में 21 लाख 69 रुपये आय से अधिक खर्च किए गए, जिसका वह जांच में स्पष्टीकरण नहीं दे सके।