दिल्ली पुलिस की रिमांड पर आए मुनीर ने फिर से राज उगलना शुरू कर दिया है। मगर जो तथ्य उसने उजागर किए हैं, उससे साफ है कि वह साइको किलर है। उसने अपने जरायम इतिहास में सबसे पहली हत्या एएमयूकर्मी शनी की महज इसलिए कर दी कि पेट्रोल पंप पर दिन में मामूली कहासुनी के दौरान शनी ने गाली दे दी थी।
बस उसी रात शनी को घर के दरवाजे पर इंतजार कर गोली मारी और मौत के घाट उतार दिया। इसके अलावा दिल्ली के जाफराबाद इलाके में दिल्ली पुलिस के सिपाही को गोली मारकर सरकारी पिस्टल लूट भी मुनीर-आशुतोष मिश्रा ने स्वीकारी है।
दिल्ली पुलिस द्वारा रिमांड पर लिए गए मुनीर व आशुतोष से जब अलीगढ़ टीम पूछताछ करने पहुंची तो उन्होंने बातों-बातों में बताया कि 14-15 मई 2013 को दिन में वह एएमयू पेट्रोल पंप पर पेट्रोल डलवाने गया था। जहां बाइक टकराने पर शनी से उसकी कहासुनी हुई। इसी कहासुनी के दौरान शनी ने उसे गाली दे दी थी। उसने दिन भर कोई दूसरा काम न कर सिर्फ शनी के घर का पता खंगाला और देर रात उसके दरवाजे पर जाकर बैठ गया।
जैसे ही वह अपनी पत्नी संग बाजार से लौटा तो उसे घेरकर फायरिंग कर दी। उसने शनी को निशाना बनाकर गोली मारी। यह उसके जरायम इतिहास की पहली हत्या थी। इसी दौरान उसने केनेडी हॉल के पास एक युवक को चाकू मारने व एक अन्य युवक को गोली मारने की घटना भी स्वीकारी।
इसके अलावा उसने बताया कि अलीगढ़ पुलिस जब पीछे लगी तो वह दिल्ली आ गए थे। यहां सऊद ने ठिकाना मुहैया कराया था। इसी दौरान उन्हें हथियार की जरूरत महसूस हो रही थी। तभी जाफराबाद इलाके में दिल्ली पुलिस के सिपाही धर्मपाल की अंटी में सरकारी पिस्टल लगी देख ली। बस आशुतोष ने इशारा किया और दोनों पीछे लग गए। यहां 27 सितंबर 2014 को आशुतोष ने धर्मपाल को गोली मारी और उसने अंटी से पिस्टल निकाल ली। इसके बाद वह दिल्ली से निकल गए थे। दोनों ने पूछताछ में वह पिस्टल कहां रखी है, यह ठिकाना भी पुलिस टीम को बताया है।
एक फोन पर बंद कराया आलमगीर की हत्या के बाद धरना
मुनीर ने पूछताछ में स्वीकारा है कि अपने विरोधी डीएसडब्ल्यू छात्र आलमगीर की हत्या के बाद जब छात्रों ने एएमयू में धरना शुरू किया तो उसे लगा कि अगर धरना खत्म नहीं हुआ तो आवाज ज्यादा उठेगी। ऐसे में पुलिस दबाव भी बढ़ेगा तो खुद उसने एक फोन पर वह धरना खत्म कराया था। उसने खुद सीधे-सीधे धरना बंद करने के संबंध में कुछ छात्र नेताओं को धमकी दी थी।
गिरफ्तार करने वाली टीम को लाइसेंस जरूरी
इस बड़े अपराधी को गिरफ्तार करने और अब मुनीर के नेटवर्क पर काम कर रही एसटीएफ टीम के चारों जाबाजों को निजी लाइसेंसी हथियार या सुरक्षा भी जरूरी हो गई है। जब भी वह सरकारी असलहे जमा करके निजी काम से जाएंगे तो जाहिर सी बात है कि सुरक्षा को खतरा होगा। इस विषय में शासन स्तर से व महकमे के स्तर से ही कुछ सोचना होगा। जब चारों से पूछा गया तो उनमें से सिर्फ अजय कौशल ने इतना बताया कि उनका पिस्टल लाइसेंस का आवेदन लंबित है। सुरक्षा के सवाल पर वह कहते हैं कि वैसे तो सरकारी असलहा हर समय साथ रहता है। बस अवकाश के दिनों में वह बिना हथियार के रहते हैं।
अब हथियार बरामदगी टीम का बड़ा प्रयास
टीम अलीगढ़ को अभी दो-दो हथियार मुनीर व आशुतोष द्वारा बताए गए ठिकानों से बरामद करने हैं। इनमें एक हथियार पान दरीबा में रेलवे मजिस्ट्रेट के गनर से लूटा गया था और दूसरा दिल्ली पुलिस के सिपाही से लूटा गया था। मजिस्ट्रेट के गनर से लूटे गए हथियार को लेकर अंदेशा है कि वह सद्दाम के किसी परिजन के माध्यम से मिल सकता है और दूसरे को लेकर पुलिस को कुछ इनपुट मिल गए हैं।
मुनीर गिरफ्तार न होता तो जल्द तय थीं हत्याएं
मुनीर ने पूछताछ में स्वीकारा है कि अगर वह जल्द गिरफ्तार न होता तो अपने विपक्षी छात्र गुट खेमे से जुड़ी दो हत्याएं तय थीं। इसके लिए खुद मुनीर ने पूरी प्लानिंग बना ली थीं। इनमें एक तो उसका सीधा-सीधा विपक्षी है और दूसरा उसका दोस्त है, जो उसके मुकदमे में गवाह है। दोनों मुकदमा वापसी या गवाही से टूटने की बात मानने को तैयार न थे। इसलिए दोनों को रास्ते से हटाने की प्लानिंग बना ली थी।