अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति जमीरउद्दीन शाह की इफ्तार पार्टी डिप्लोमेसी काम नहीं आई। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में यूपीए सरकार द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद एएमयू अल्पसंख्यक स्वरूप से संबंधित मसले में दायर याचिका को वापस लेने का फैसला लिया है। इससे एएमयू को करारा झटका लगा है।
नई दिल्ली के पार्लियामेंट हाउस एनेक्सी में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच द्वारा 2 जुलाई को रोजा इफ्तार का आयोजन किया गया था। इसमें मंच के मुख्य संरक्षक एवं आरएसएस के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार समेत कई लोग मौजूद थे।
आरएसएस के रोजा इफ्तार में शामिल होने पर एएमयू वीसी काफी आलोचना झेल रहे हैं। इसके बाद उन्होंने मीडिया एवं अलीग बिरादरी को सफाई दी कि मुसलमानों ने पीएम मोदी को स्वीकार कर लिया है। केंद्र सरकार की अनदेखी मुसलमानों के लिए घातक होगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि काफी सोच विचार के बाद आरएसएस के रोजा इफ्तार में गए थे।
कुलपति अभी आलोचनाओं से उबरे भी नहीं कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एएमयू अल्पसंख्यक स्वरूप से संबंधित मसले में याचिका वापस लेने का फैसला लेकर उनके इफ्तार डिप्लोमेसी को झटका दिया है। मीडिया रिपोर्ट में तो इसकी भी चर्चा है कि केंद्र ने यूपीए सरकार द्वारा दायर याचिका वापस लेने का फैसला लेने के साथ ही मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने एएमयू में 50 प्रतिशत मुस्लिम आरक्षण से संबंधित जितने भी पत्र जारी किए गए थे, उसे वापस ले लिया है।
इस संबंध में एएमयू जनसंपर्क विभाग के एमआईसी डॉ. राहत अबरार ने बताया कि यूपीए सरकार ने एएमयू के समर्थन में जो याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी, उसे सरकार द्वारा वापस लेने के फैसले की सूचना मिल रही है। अभी मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और हम अपना पक्ष मजबूती से वहां रखेंगे।
राष्ट्रीय संग्रहालय से लेकर एएमयू तक खंगाले गए रिकार्ड
अलीगढ़। एएमयू अल्पसंख्यक स्वरूप को लेकर राष्ट्रीय संग्रहालय से लेकर एएमयू के मौलाना आजाद लाइब्रेरी एवं विभागों से भी रिकॉर्ड खंगाले गए। माना जा रहा कि राष्ट्रीय संग्रहालय एवं एएमयू लाइब्रेरी से प्राप्त दस्तावेज से सरकार के पक्ष को काफी मजबूती मिली है।