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एएमयू: इस टकसाल ने गढ़े हैं एक से बढ़कर एक लाल

Sat, 03 Nov 2018 02:01 AM IST
कौशल कुमार ओझा ,अलीगढ़
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AMU
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प्रसिद्ध उर्दू साहित्यकार पद्मश्री प्रो. काजी अब्दुल सत्तार कहते थे कि टकसाल से निकले सिक्कों की कीमत मुकर्रर है लेकिन सर सैयद के इस टकसाल (एएमयू) से निकले सिक्के अनमोल एवं बेमिसाल होते हैं। यह बहुत हद तक सही भी है। एएमयू छात्र संघ ने देश एवं दुनिया को एक से बढ़कर एक नेता, अधिकारी, साहित्यकार, वैज्ञानिक एवं वैश्विक स्तर के बेहतर इंसान दिये हैं। दक्षिण अफ्रीका के मो. अमीन बुलबुलिया 1953-54 में एएमयू छात्र संघ के अध्यक्ष रह चुके हैं। 
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1884 में बना सिड्डन यूनियन क्लब 1920 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय बनने के बाद छात्र संघ (एएमयूएसयू) में तब्दील हो गया। 1918 में सिड्डन यूनियन क्लब के उपाध्यक्ष जाकिर हुसेन थे, जो बाद में भारत के राष्ट्रपति बने। छात्र संघ बनने के बाद पहले अध्यक्ष केएम खुदाबख्श (1920) बने।

एएमयू उर्दू अकादमी के निदेशक डॉ. राहत अबरार ने कहते हैं कि 1924-25 में केजी सैयदेन अध्यक्ष बने जो बाद में भारत सरकार के शिक्षा सचिव रहे। 1925-26 के अध्यक्ष कुंवर अशरफ अली खान मशहूर इतिहासकार हुए। 1934-35 के अध्यक्ष आले अहमद सुरूर भारतीय उपमहाद्वीप के बहुत बड़े उर्दू साहित्यकार बने। उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था।
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1941-42 के अध्यक्ष अजीजुरहमान उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री बने। 1946-47 के अध्यक्ष एटीएम मुस्तफा आईएएस अधिकारी बने। 1958-59 में अध्यक्ष बने आबिदउल्ला गाजी हावर्ड यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर बने और प्रमुख इस्लामी विद्वान है। 1962-63 के अध्यक्ष अनीस उर शेरमानी अलीगढ़ की छर्रा सीट से विधायक एवं उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री बने। 1963-64 के अध्यक्ष वसीर अहमद खान इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के पीवीसी बने। 1967-68 के अध्यक्ष मो. अदीब राज्य सभा सांसद बने।

1972-73 के अध्यक्ष आरिफ मोहम्मद खान उत्तर प्रदेश एवं केंद्र में मंत्री बने। 1989-90 के अध्यक्ष हाफिज मोहम्मद उस्मान सुन्नी वक्फ बोर्ड और राज्य सूचना आयोग के चेयरमैन बने। 1906-07 के अध्यक्ष नफीस अहमद उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री बने। 1972-73 में एएमयू छात्र संघ के सचिव रहे आजम खां उत्तर प्रदेश के मंत्री बने। वर्तमान में रामपुर जिले से विधायक हैं। अलीगढ़ के वर्तमान मेयर मो. फुरकान एएमयू के उपाध्यक्ष एवं अध्यक्ष रह चुके हैं। 1980-81 में सचिव निर्वाचित हुए मोहम्मद अली अशरफ फातिमी बाद में केंद्रीय राज्य मंत्री बने। वहीं डॉ. मैराजुद्दीन उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री बने।
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