शुक्रवार को बाब-ए-सैयद पर दो छात्र गुटों में झड़प हो गई। देखते ही देखते दोनों तरफ से समर्थक इकट्ठा हो गए। बाद में छात्र नेताओं के हस्तक्षेप से मामला शांत हुआ। कहा गया कि एक छात्र गुट आक्रामक रुख अपनाना चाहता था। जबकि दूसरा छात्र गुट जिम्मेदारी के साथ धरने को आगे बढ़ाने का समर्थक था।
'सेक्युलर होना सिर्फ मुसलमानों की जिम्मेदारी नहीं'
नागरिकता संशोधन कानून, एनआरसी, एनपीआर, जेएनयू हिंसा के विरोध में शुक्रवार को आर्ट फैकल्टी के पास एक सभा का आयोजन किया गया जिसमें दिल्ली यूनिवर्सिटी के शिक्षक अपूर्वानंद और वरिष्ठ पत्रकार कुर्बान अली ने शिरकत की।
सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षक अपूर्वानंद ने कहा कि आज बेहद अफसोस की बात है कि राज्य की स्वतंत्र संस्थाएं भी बहुसंख्यकवाद की चपेट में आ गई हैं। जबकि इन्हें अपनी तटस्थ भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून को लेकर इस समय देश में जो उभार आया हुआ है, उसे केवल मुसलमानों के असंतोष का उभार कह देना एक संकरी बात होगी। यह बेहद सुखद बात है कि देश के लोकतांत्रिक मूल्यों को बचाने के लिए मुसलिम समुदाय आगे आया है। उन्होंने कहा कि सेक्युलर होने की जिम्मेदारी सिर्फ मुसलमानों की नहीं है। बल्कि यह एक ऐसा अनुबंध है जिसमें सभी बंधे हैं।
वरिष्ठ पत्रकार कुर्बान अली ने कहा कि 95 साल पहले एक तंजीम गठित की गई, जिसका अलग झंडा था। आज यह तंजीम संविधान को अपने तरीके से बदलना, तोड़ना मोड़ना चाहती है। इसका नाम आरएसएस है। जबकि इस देश के स्वतंत्रता आंदोलन की शुरुआत बहादुर शाह जफर के नेतृत्व में हुई और आजादी महात्मा गांधी के नेतृत्व में मिली। उन्होंने कहा कि यह बहुत अच्छी बात है कि देर से ही सही कुलपति प्रो. तारिक मंसूर धरना दे रहे छात्रों से मिलने तो आए। इससे संवाद का रास्ता खुलेगा। इस अवसर पर आर्ट फैकल्टी सहित अन्य विभागों के शिक्षक, शिक्षिकाएं, छात्र और छात्राएं मौजूद रहे।
वीसी और रजिस्ट्रार का इस्तीफा मांगा
अलीगढ़। एएमयू कुलपति और रजिस्ट्रार के इस्तीफे की मांग करते हुए चुंगी गेट से लेकर बाब-ए-सैयद तक मार्च निकाला। इनके हाथों में पोस्टर बैनर थे। इसमें कक्षा 11 और कक्षा 12 के छात्र छात्राएं शामिल थे।