हिजाब पहनने की वजह से अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की छात्रा गजाला अहमद के हाथ से नौकरी फिसल गई। इसी वर्ष मास कम्यूनिकेशन में परास्नातक करने वाली छात्रा का आरोप है कि दिल्ली के एक न्यूज पोर्टल पर एंकर के लिए आवेदन किया था। नौकरी भी मिल गई थी लेकिन हिजाब पहनने पर उनको मना कर दिया गया। इस वाकये से उनके परिजन हैरत में हैं। वहीं, एएमयू के छात्र नेताओं ने इस मामले में नाराजगी व्यक्त की है।
वर्ष 2016-17 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छात्र संघ में कैबिनेट सदस्य रहीं गजाला अहमद कक्षा छह से यहां पढ़ी हैं। अलीगढ़ निवासी पिता एएमयू में ही कार्यरत थे और अब रिटायर हो चुके हैं। इसी वर्ष परास्नातक करने के बाद गजाला ने दिल्ली के एक न्यूज पोर्टल में एंकर के पद के लिए आवेदन किया था। गजाला अहमद ने बताया कि सभी बातें तय हो गई थीं। उन्हें न्यूज एंकर की नौकरी भी मिली थी, लेकिन दिल्ली पहुंचने के बाद उन्हें कहा गया कि हिजाब पहनकर कैसे एंकरिंग करोगी। गजाला के अनुसार उन्होंने कंपनी वालों से कहा कि वह उन्हें कुछ दिन का समय दें। धीरे-धीरे वह अपने आप को नए माहौल में ढाल लेंगी, लेकिन उन्हें साफ मना कर दिया गया।
हिजाब के चलते नौकरी न देने पर बहस क्यों नहीं
अलीगढ़। गजाला को हिजाब पहनने के कारण नौकरी न देने पर एएमयू छात्र संघ के पूर्व उपाध्यक्ष नदीम अंसारी ने कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने कहा कि देश में इस बात पर बहस होती है कि किसी को कुछ पहनने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता, लेकिन अगर कोई व्यक्ति अपने पहनावे के कारण नौकरी से वंचित किया जाता है तो इस पर बहस नहीं की जाती है। यह बेहद निराशाजनक स्थिति है। इस मानसिकता को बदलने की आवश्यकता है।
बेहद निराशाजनक है। पहनावे के आधार पर उसकी योग्यता का आकलन नहीं किया जा सकता। एक उभरती हुई प्रतिभा को पहनावे के आधार पर अवसर न देना, निंदनीय है।
मो. शिकोह, वरिष्ठ छात्र नेता एएमयू