उन्होंने अकबर की सत्य की खोज में अंतरधार्मिक संवाद और विभिन्न परंपराओं के बीच समझ बढ़ाने के प्रयासों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि अकबर के समग्र संस्कृति के आदर्श फतेहपुर सीकरी की कला और वास्तुकला में प्रतीकात्मक रूप से प्रकट होते हैं, जहां श्रीराम और हनुमान जी की मूर्तियां महल की दीवारों पर दिखाई देती हैं।
प्रो. शीरीं मूसवी ने कहा कि अशोक, अकबर और नेहरू जैसे तीन दूरदर्शी शासकों ने भारत की समावेशी पहचान को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभाई। प्रो. रेजावी ने अकबर की धार्मिक नीति को उजागर किया, जिसमें उन्होंने कई हिंदुओं को साम्राज्य सेवा में शामिल किया।
प्रो. रेजावी की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस से फतेहपुर सीकरी रिविजिटेड पुस्तक जल्द प्रकाशित होने वाली है। प्रख्यात इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब ने अकबर के मित्र और इतिहासकार अबुल फजल के विचारों के बारे में बताया।