त्योहारी सीज़न शुरू होने से ठीक पहले अरहर दाल, देसी घी और रिफाइंड तेल के दामों में एक बार फिर इजाफा हुआ है। बाजार में आवश्यक खाद्य सामग्रियों की कीमतों में इस अचानक वृद्धि ने आम उपभोक्ताओं को झटका दिया है, जिसे 'महंगाई का पटाखा' कहा जा रहा है। हालांकि, कारोबार के जानकार और व्यापारी वर्ग का मानना है कि कीमतों में इस बढ़ोतरी का खरीदारों पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। उनका कहना है कि इस बार जीएसटी दरों में कमी और बाजार में आए उत्साह के माहौल को देखते हुए लोगों ने त्योहार को उल्लास के साथ मनाने का पूरा मन बना लिया है।
वस्तु, कीमत पहले- कीमत अब (रुपये प्रति किलो)
- घी (स्वास्तिक)- 680- 740
- दाल अरहर- 95-100
- रिफाइंड- 125-128
मिठाई, पकवान और दावतों के लिए घी-तेल जैसी सामग्रियों की मांग ऊंची बनी हुई है। - आकाश नलवानी, किराना व्यापारी
लोगों के उत्साह के आगे महंगाई का यह हल्का झटका कुछ नहीं है। खरीददारी में कोई कमी नहीं। - विशाल भगत, महामंत्री, खाद्यान्न व्यापार मंडल
कीमत वही लेकिन वजन कम कर दिया
थोक कारोबारी हर्ष गुप्ता कहते हैं कि कुछ कंपनियों ने कीमतों को स्थिर रखते हुए पैकेट का वजन कम कर दिया है। रिफाइंड तेल के पैकेटों में 50 से 100 ग्राम तक की कटौती की गई है, जबकि ग्राहकों से पुरानी कीमत ही ली जा रही है। ग्राहकों को पहली नज़र में लगा कि दाम नहीं बढ़े, लेकिन उन्हें यह महसूस हुआ कि वह अदा की जा रही कीमत में पहले से कम माल खरीद रहे हैं। कंपनियों की ओर से लागत वृद्धि को समायोजित करने का एक तरीका है, जिसका सीधा बोझ ग्राहकों की जेब पर पड़ रहा है।-हर्ष गुप्ता, कारोबारी