तुलसी और कृत्रिम पराबैंगनी विकिरण
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एएमयू के वनस्पति विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों ने पराबैंगनी (अल्ट्रा वाइलेट-यूवी) विकिरण के जरिये अश्वगंधा, कोलियस, मकोय, मेंथा, गेंदे का फूल, स्टीविया औषधीय पौधे की गुणवत्ता बढ़ाने में कामयाबी हासिल की है।
शोध में पर्यावरण संरक्षण और औषधीय गुणों में वृद्धि अहम संभावनाएं सामने आई हैं। वैज्ञानिकों ने ओजोन परत को छेद करके पृथ्वी की सतह पर पराबैंगनी विकिरण के बढ़ते स्तर को लेकर चिंता भी जताई है। पराबैंगनी विकिरण ए, बी और सी है, जिसमें पराबैंगनी ए कम, जबकि बी खतरनाक है। हालांकि, सी धरती तक नहीं पहुंच पाती है।
इस शोध परियोजना पर विभाग के प्रो. मोहम्मद मसरूर खान के नेतृत्व में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद नईम और छात्रा मारिया कार्य कर रही हैं। प्रो. मसरूर खान ने बताया कि विभाग के बगीचे में प्रयोगशाला बनाई गई, जहां कृत्रिम यूवी विकिरण ए, बी और सी बनाकर औषधीय पौधे पर शोध शुरू किया। पहले तीनों कृत्रिम यूवी को सुबह आठ बजे से शाम चार बजे तक पौधों के ऊपर लगाया गया।
साथ ही सूर्य की किरणें भी सीधी पौधों पर पड़ीं। इससे पौधे की गुणवत्ता में वृद्धि देखी गई। रात में भी आठ घंटे तीनों कृत्रिम यूवी को पौधों के ऊपर लगाया गया, जिसमें भी पौधों के गुणों में वृद्धि देखी गई। उन्होंने कहा कि यूवी-सी विकिरण को ओजोन परत सोख लेती है।