वर्तमान में करीब 260 डॉक्टर तैनात हैं। इनमें 93 प्रोफेसर, 15 एसोसिएट प्रोफेसर, 112 असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। वहीं, स्वीकृत पदों के सापेक्ष लगभग 30 डॉक्टरों की कमी बताई जा रही है, जो अलग-अलग बीमारियों के उपचार के विशेषज्ञ हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बेड क्षमता के अनुरूप पर्याप्त स्टाफ की नियुक्ति आवश्यक है, अन्यथा आपातकालीन और गंभीर मरीजों की देखभाल पर असर पड़ सकता है। बढ़ते मरीज भार और सीमित कर्मचारियों के बीच स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु रखना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
मेडिकल कॉलेज में कर्मचारियों की कमी है। कमी को दूर करने के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन कोशिश में जुटा है। मंत्रालय को लगातार पत्राचार किया जा रहा है।-प्रो. अंजुम परवेज, प्राचार्य, जेएन मेडिकल कॉलेज
नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी पर नर्सेज एसोसिएशन ने जताई चिंता
एएमयू नर्सेज एसोसिएशन ने नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी पर चिंता जताई है। संरक्षक आशिक अली ने कहा कि नर्सिंग स्टाफ की कमी तत्काल दूर कर निर्धारित नर्स-रोगी अनुपात लागू किया जाए। 14-15 वर्षों से लंबित डीपीसी एवं पदोन्नति प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाए। नर्सिंग सुपरिटेंडेंट और चीफ नर्सिंग ऑफिसर के पद सृजित व भरे जाएं। अस्थायी व फिक्स्ड वेतन पर कार्यरत कर्मचारियों को नियमित किया जाए। सेवानिवृत्ति तक नाइट ड्यूटी और अत्यधिक कार्यभार के दबाव को समाप्त किया जाए।