पैनल बनाने में जो सामग्री इस्तेमाल की गई, वह भारत में नहीं की गई है। पैनल की मजबूती का खास ख्याल रखा गया है। साल में आठ महीने गर्मी रहती है और कमरे को ठंडा रखने के लिए एसी इस्तेमाल होती है। मगर इस पैनल में एसी की जरूरत नहीं पड़ेगी। मान लीजिए बाहर अधिकतम तापमान 40-42 डिग्री सेल्सियस है, तो अंदर 25-27 डिग्री सेल्सियस होगा। ईंट-मसाला का इस्तेमाल न होना पर्यावरण के लिए बेहतर होगा। बाजार में लाने की तैयाारी हो रही है।-डॉ. मोहम्मद रेहान सादिक, सिविल इंजीनियरिंग विभाग, एएमयू
बिजली के बिल में कमी से निकल जाएगी लागत
इंजीनियर यासिर खान ने बताया कि उदाहरण के लिए सामान्य ईंट से 10 गुणा 10 कमरे के निर्माण की लागत एक लाख रुपये आती है, जबकि पैनल के साथ यह खर्चा 1.15 लाख रुपये हो जाता है, लेकिन यह बाद में सस्ता साबित हो जाता है। ईंट से बने कमरे को ठंडा करने में एसी का इस्तेमाल करते हैं, जिसमें बिजली पर हर साल 22651 रुपये का खर्च आता है, जबकि पैनल के कमरे का तापमान बाहरी से तापमान से 15 डिग्री सेल्सियस कम रहेगा। इस हिसाब से बिजली पर 10251 रुपये खर्च आएगा। पैनल से गर्मी के मौसम में कूलिंग उपकरणों पर निर्भरता घटेगी और हर साल में 12400 रुपये की बचत होगी। इस पैनल के उपयोग से भवन निर्माण में दीवारों पर ईंटों का भारी बोझ नहीं पड़ेगा, जिससे संरचना हल्की और अधिक सुरक्षित होगी।
ईंट से बने कमरे में बिजली खपत पैनल से बने कमरे में खपत
माह यूनिट रुपये यूनिट रुपये
जनवरी 203 913.5 124 372
फरवरी 166 498 116 345
मार्च 205 795 172 516
अप्रैल 407 2645.5 221 994.5
मई 521 3386.5 281 1264.5
जून 552 3588 302 1359
जुलाई 492 3198 290 1305
अगस्त 434 2821 271 1219.5
सितंबर 394 1773 247 1111.5
अक्तूबर 318 1431 208 936
नवंबर 224 1008 150 450
दिसंबर 198 594 126 378
योग यूनिट 22651.5 योग रुपये 10251.5
नोट : यूनिट के दर तीन, 4.5 और 6.5 रुपये हैं