परंपरागत फसलों को जहां नील घोड़ा, बंदर और अन्य जानवर नुकसान पहुंचाते हैं। मक्का और अन्य फसलों में किसानों के लिए ये जानवर बड़ी समस्या हैं। क्योंकि चिकोरी जमीन के भीतर होती है लिहाजा पशु नुकसान नहीं पहुंचा पाते।
अनुबंध खेती कर रहे हैं किसान
किसान सोनू और कलेक्शन सेंटर चलाने वाले गांव पुरैनी निवासी सोनू चौधरी का कहना है कि इसके दो बीज आते हैं। एक फ्रांस से आता है, जिसकी कीमत सात हजार और इटली से आने वाले बीज की कीमत पांच हजार रुपये प्रति किलोग्राम है। बीज देते समय ही किसान से चिकोरी का रेट तय कर लिया जाता है। इस बार 600 रुपये प्रति क्विंटल पर किसानों से चिकोरी खरीदी जा रही है।
यह भी जानें
- एटा की चिकोरी को एक जिला-एक उत्पाद में किया गया शामिल
- अलीगढ़ में भी आठ हजार किसान कर रहे खेती
- 18 प्लांट लगे जिले में पिछले 10 साल में
- 85 प्लांट हैं चिकोरी के एटा जनपद में
- 50 हेक्टेयर में हो रही है इस समय खेती