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Chicory: अमेरिका वाले भी चख रहे अलीगढ़ की चिकोरी का स्वाद, 80 करोड़ पहुंचा कारोबार

Sat, 24 May 2025 02:16 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

परंपरागत फसलों को जहां नील घोड़ा, बंदर और अन्य जानवर नुकसान पहुंचाते हैं। मक्का और अन्य फसलों में किसानों के लिए ये जानवर बड़ी समस्या हैं। क्योंकि चिकोरी जमीन के भीतर होती है लिहाजा पशु नुकसान नहीं पहुंचा पाते।
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अतरौली के पुरैनी गांव में चिकोरी से लदे ट्रैक्टर - फोटो : संवाद
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विस्तार
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एक जिला-एक उत्पाद योजना में एटा की चिकोरी को भी शामिल किया गया है। अलीगढ़ में भी करीब आठ हजार किसान चिकोरी की खेती कर रहे हैं। यहां से 10 से ज्यादा देशों में इसका निर्यात किया जा रहा है। पहली बार अमेरिका भी चिकोरी के पांच कंटेनर भेजे गए हैं। इसका उपयोग कोका पाउडर के विकल्प के रूप में किया जाता है। इसमें कैफीन नहीं होता। कॉफी पाउडर के अलावा अन्य दवा, चॉकलेट फ्लेवर वाले उत्पादों, टॉफी, बिस्किट और दवाओं में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है।

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एक कंटेनर में करीब 150 से 200 टन चिकोरी भेजी जाती है। वर्ष 2014 में अतरौली में चिकोरी पाउडर बनाने के दो प्लांट लगाए गए थे। आज इनकी संख्या करीब 18 है। 50 हेक्टेयर में इसकी खेती हो रही है। उद्यमियों का कहना है कि एक जिला-एक उत्पाद योजना में अलीगढ़ को भी शामिल किया जाना चाहिए। यहां करीब आठ हजार किसान चिकोरी की खेती से जुड़े हैं और करीब 80 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार है।

दिखने में यह शकरकंद की तरह लगती है, इसके बाद इसे पाउडर,लिक्विड और रोस्टेड क्यूब के रूप में तैयार कर बेचा जाता है। अतरौली की गंगा डेयरी (चिकोली प्लांट) का ही सालाना कारोबार 50 करोड़ रुपये है। इसके निदेशक सजल अग्रवाल का कहना है कि रूस, यूक्रेन, सर्बिया, मिश्र, इंडोनेशिया, पोलैंड, स्पेन आदि दस से ज्यादा देशों में चिकोरी निर्यात की जा रही है। पहली बार अमेरिका भी निर्यात की जा रही है। उन्होंने बताया कि यूक्रेन में उनकी फर्म का कार्यालय है। रूस-युक्रेन युद्ध का उनके कारोबार पर कोई असर नहीं पड़ा है। शुरू में दो महीने समस्या आई, सरकार ने साथ दिया और रुपये में भुगतान कराया। उन्होंने बताया कि उनकी फर्म को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर हाल ही में एफएसएससी 22000 का प्रमाण पत्र मिला है।

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जंगली जानवर भी नहीं करते नुकसान

परंपरागत फसलों को जहां नील घोड़ा, बंदर और अन्य जानवर नुकसान पहुंचाते हैं। मक्का और अन्य फसलों में किसानों के लिए ये जानवर बड़ी समस्या हैं। क्योंकि चिकोरी जमीन के भीतर होती है लिहाजा पशु नुकसान नहीं पहुंचा पाते।

अनुबंध खेती कर रहे हैं किसान
किसान सोनू और कलेक्शन सेंटर चलाने वाले गांव पुरैनी निवासी सोनू चौधरी का कहना है कि इसके दो बीज आते हैं। एक फ्रांस से आता है, जिसकी कीमत सात हजार और इटली से आने वाले बीज की कीमत पांच हजार रुपये प्रति किलोग्राम है। बीज देते समय ही किसान से चिकोरी का रेट तय कर लिया जाता है। इस बार 600 रुपये प्रति क्विंटल पर किसानों से चिकोरी खरीदी जा रही है।

यह भी जानें
  • एटा की चिकोरी को एक जिला-एक उत्पाद में किया गया शामिल
  • अलीगढ़ में भी आठ हजार किसान कर रहे खेती
  • 18 प्लांट लगे जिले में पिछले 10 साल में
  • 85 प्लांट हैं चिकोरी के एटा जनपद में
  • 50 हेक्टेयर में हो रही है इस समय खेती
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