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Amar Ujala Foundation Day: बेहतरीन हिंदी पत्रकारिता यानी अमर उजाला, दिल बोल उठा यह

Thu, 23 Jan 2025 03:03 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

अमर उजाला की खबरों में सच्चाई होती है। अमर उजाला की खबरें समाज को एक नई रोशनी देती है, जबकि उन्होंने तो परेशान हाल लोगों को आंखें दी हैं।
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अमर उजाला अलीगढ़ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिंदी पत्रकारिता में अमर उजाला बेहतरीन अखबार : प्रो. जिल्लुर्रहमान

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 पद्मश्री प्रोफेसर हकीम सैयद जिल्लुर्रहमान ने अलीगढ़ में अमर उजाला यूनिट की स्थापना की वर्षगांठ पर अपनी नेक ख्वाहिशें पेश करते हुए कहा कि अमर उजाला यूं ही तरक्की प्रगति करता रहे। हिंदी पत्रकारिता के लिए अमर उजाला बेहतरीन अखबार है।

उन्होंने कहा कि हिंदी अखबारों में अमर उजाला ने अपनी खबरों व लेखों के जरिये अलग पहचान बनाई है। अलीगढ़ जिले के लिए अमर उजाला बहुत अहम है, जो सिर्फ अलीगढ़ ही नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूरे देश-विदेश में ऑफलाइन-ऑनलाइन पढ़ा जाता है। अमर उजाला में प्रकाशित लेख काफी जानकारी परक होते हैं।
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खबरों के साथ सामाजिक सरोकार भी : प्रो. इरफान
प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब ने 18 साल पूरे होने पर अमर उजाला को मुबारकबाद दी है। उन्होंने कहा कि अमर उजाला खबरों के साथ सामाजिक सरोकार रखता है। पहले अलीगढ़ में स्थानीय अखबार प्रकाशित होते थे, जिनमें स्थानीय खबरें ही होती थीं। अलीगढ़ में अमर उजाला पहला ऐसा अखबार बना, जिसमें स्थानीय के साथ-साथ देश और दुनिया की खबरें होती हैं। यही कामना करते हैं कि अमर उजाला के पाठक निरंतर बढ़ते रहें।

विश्वसनीयता अमर उजाला की विशेषता : कुलपति
राजा महेंद्र प्रताप राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एनबी सिंह ने अमर उजाला अलीगढ़ की स्थापना वर्षगांठ पर अमर उजाला परिवार को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि अमर उजाला की भाषा शैली बेहद संतुलित है। सोशल मीडिया और अन्य प्रकार के संचार माध्यमों के बीच अमर उजाला आज की विश्वसनीय है।

अमर उजाला ने खबरों से दी रोशनी : डॉ. शन्नो रानी

डॉ. शन्नो रानी ने अमर उजाला परिवार को अलीगढ़ संस्करण के 18वीं वर्षगांठ पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि अमर उजाला की खबरों में सच्चाई होती है। अमर उजाला की खबरें समाज को एक नई रोशनी देती है, जबकि उन्होंने तो परेशान हाल लोगों को आंखें दी हैं।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर 1975 में अपना क्लीनिक खोला था। आस-पास जिलों में कृत्रिम आंख लगाने का क्लीनिक नहीं था। इलाज कराने देश भर के अलग-अलग शहरों से मरीज अलीगढ़ आते थे, आज भी आते हैं। हालांकि, मरीजों की तादाद में कमी आई है, क्योंकि वक्त के साथ हर शहर में इलाज में अत्याधुनिक सुविधाएं भी बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि उनका अमर उजाला से नाता आज का नहीं, बल्कि 1975 का है, जब उन्होंने क्लीनिक खोला था, तब अमर उजाला ने इसकी खबर छापी थी। अखबार का यह उदार रवैया उन्हें बहुत पसंद आया, तभी से अमर उजाला से उनका जुड़ाव है।

अमर उजाला पर बढ़ गई जिम्मेदारियां : प्रेमकुमार
वरिष्ठ साहित्यकार प्रेमकुमार ने कहा कि 18 साल में अमर उजाला संस्करण ने सफलता के शिखर तय किए हैं। अपने को निष्पक्ष और अच्छा बनाए रखा है। उम्मीद की जाती है कि अपनी पुरानी परंपराओं को बनाए रखे। उम्र 18 साल की हो गई। अब युवा हो रहा है। अब और संभलकर चलने की जरूरत है। केवल लगातार प्रकाशित होने के लिए बधाई दी ही जानी चाहिए, लेकिन लंबी इस अवधि में तमाम सम-विषम परिस्थितियों में बाधाओं, अवरोधों, अड़चनों के बीच अपनी आन-बान-शान के साथ अनथक आगे बढ़ते रहने तथा उतरोत्तर, विकसित, समृद्ध, नूतन और आकर्षक होते जाने के लिए इसकी भरपूर प्रशंसा की जानी चाहिए।

अलीगढ़ से प्रकाशित होने के बाद अलीगढ़ और यहां की जनता की चिंताओं और समस्याओं, संघर्षों, उपलब्धियों को अधिकाधिक महत्व और स्थान मिलता रहा है अपेक्षाकृत। यहां की सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक,साहित्य, खेल संबंधी, व्यापारिक घटनाओं और गतिविधियों को पर्याप्तजिम्मेदारी, रचनात्मक, सकारात्मक सोच के साथ अधिकाधिक और अनेक बार रेखांकित किया है।
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विश्वनीयता के कारण बेहद लोकप्रिय : सुरेश कुमार

बड़ी प्रसन्नता की बात है कि लोकप्रिय अमर उजाला अपने अलीगढ़ संस्करण का 18 वां स्थापना दिवस मना रहा है। इसके संस्करण निकलते हैं। विश्वसनीयता और प्रमाणिकता के कारण यह अखबार पूरे देश और विदेश में लोकप्रिय है। प्रतिष्ठित है। समय समय पर मैं इसमें रचनात्मक सहयोग भी देता रहा।

मुझे खुशी होती है कि मेरा एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र से मेरा पारिवारिक सा रिश्ता है। यह पत्र निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर हो। यह मेरी कामना है। जो विश्वसनीयता कायम की है वह बनी रहे, और निरंतर उन्नति के शिखर को छुए। पूरे अमर उजाला परिवार को मेरी शुभकामनाएं हैं।

नीरज के पुत्र गुंजन ने कहा - अमर उजाला से है पारिवारिक रिश्ता
अमर उजाला के स्थापना दिवस पर बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं। हमारा और पापा (गोपाल दास नीरज) का अमर उजाला के पूरे स्टाफ के साथ परिवार जैसा रिश्ता रहा है। सभी लोग समय-समय पर पापा से मिलने घर पर आते रहे। बेहद अपनत्व भरा अनुभव रहा है। पापा की रचनाएं हम बचपन से ही अमर उजाला में पढ़ते आ रहे हैं। पापा अब इस दुनिया में नहीं है लेकिन प्रत्येक वर्ष उनके जन्मदिन पर अमर उजाला उसी स्नेह के साथ उनको याद करता है। - मिलन प्रभात गुंजन, पद्मभूुषण गोपाल दास नीरज के पुत्र

अमर उजाला के साथ चला है घटनाओं का सफर: - तारा चंद्र पांडेय
जब अमर उजाला आगरा से प्रकाशित होकर आता था, तब से मैं इसका पाठक हूूं। जेपी आंदोलन, इमरजेंसी, इंदिरा गांधी की हत्या, राजीव गांधी की हत्या से लेकर अटल बिहारी के पहली बार प्रधानमंत्री बनने से लेकर अब तक का सफर देखा है। सन 1997 में जब अमर उजाला का प्रकाशन अलीगढ़ से शुरू हुआ तो बेहद खुशी हुई। बेहद अपनापन लगा और स्थानीय सरोकारों से पत्र जुड़ गया। यह सिलसिला अभी तक जारी है।
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